टीएमयू में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस यूयू ललित का सार्थक संवाद
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी के ऑडिटोरियम में फ्रॉम कोर्टरूम टू नेशन बिल्डिंगः लीडरशिप लेसन फ्रॉम द ज्यूडिशरी पर हुई लीडरशिप टाक सीरीज़, टीएमयू के कुलाधिपति श्री सुरेश जैन और एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर श्री अक्षत जैन ने प्रशासनिक भवन में चीफ गेस्ट न्यायमूर्ति श्री उदय उमेश ललित को भेंट किया स्मृति चिन्ह
युवाओं से किया आह्वान, वे संवैधानिक मूल्यों का सम्मान करें
न्यायपालिका की समानता, न्याय और विकास में अहम भूमिका
अनुच्छेद 31ए, 31बी, 31सी और 21 की विस्तार की व्याख्या
तीन तलाक कानून से मुस्लिम महिलाएं हुई और अधिक सशक्त
निःशुल्क एवम् अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा एक ऐतिहासिक निर्णय
शिक्षा में निजी संस्थानों की भागीदारी से अवसरों का विस्तार
ईडी श्री अक्षत जैन ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश को बताईं टीएमयू की उपलब्धियां
देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति श्री उदय उमेश ललित ने कहा, न्यायपालिका केवल न्याय प्रदान करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह संवैधानिक मूल्यों की संरक्षक और सामाजिक परिवर्तन की प्रेरक शक्ति भी है। भारतीय न्यायपालिका ने देश में लोकतंत्र को सुदृढ़ करने और समावेशी विकास को गति देने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया, वे संवैधानिक मूल्यों का सम्मान करते हुए नैतिक नेतृत्व अपनाएं और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें। स्वतंत्रता प्राप्ति के समय देश में कमजोर अर्थव्यवस्था, व्यापक गरीबी, निम्न साक्षरता दर, औद्योगिकीकरण का अभाव, कमजोर स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा में महिलाओं की कम भागीदारी, जातिगत असमानता, बेरोजगारी, खाद्यान्न संकट, वंचित वर्गों की न्याय तक सीमित पहुंच सरीखी गंभीर समस्याएं प्रमुख थीं। इन परिस्थितियों के बावजूद संविधान और न्यायपालिका ने देश को समानता, न्याय और विकास के मार्ग पर आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। न्यायमूर्ति श्री ललित तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी, मुरादाबाद की ओर से फ्रॉम कोर्टरूम टू नेशन बिल्डिंगः लीडरशिप लेसन फ्रॉम द ज्यूडिशरी पर लीडरशिप टाक सीरीज़ के सेशन- 18 में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। इससे पूर्व मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति श्री उदय उमेश ललित, टीएमयू के कुलपति प्रो. वीके जैन, डीन एकेडमिक्स प्रो. मंजुला जैन, कॉलेज ऑफ लॉ एंड लीगल स्टडीज के डीन प्रो. हरबंश दीक्षित आदि ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके टाक सीरीज़ का ऑडी में शुभारम्भ किया। मुख्य अतिथि सीधे प्रशासनिक भवन पहंुचे, जहां यूनिवर्सिटी के आला अफसरों ने बुके देकर गर्मजोशी से स्वागत किया। अंत में वीसी ने मुख्य अतिथि को पोट्रेट देकर सम्मानित किया। टाक सीरीज के बाद टीएमयू के कुलाधिपति श्री सुरेश जैन और एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर श्री अक्षत जैन ने प्रशासनिक भवन में चीफ गेस्ट न्यायमूर्ति श्री उदय उमेश ललित को बुके और स्मृति चिन्ह देकर गर्मजोशी से स्वागत किया। ईडी श्री अक्षत जैन ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश को यूनिवर्सिटी की बड़ी उपलब्धियां बताईं।
पूर्व मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति श्री ललित ने संविधान के अनुच्छेद 31ए, 31बी एवं 31सी का उल्लेख करते हुए बताया कि इन प्रावधानों ने भूमि सुधार और जनकल्याणकारी नीतियों को लागू करने में सहायता की। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की ओर से शुरू किए गए आर्थिक सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन नीतियों ने संपत्ति के सृजन के साथ-साथ उसके संतुलित वितरण का मार्ग प्रशस्त किया। राष्ट्रीयकरण से उदारीकरण तक की आर्थिक यात्रा ने देश को आज विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित किया है। न्यायपालिका ने अनुच्छेद 21 की व्यापक व्याख्या करते हुए इसे गरिमापूर्ण जीवन, स्वच्छ पर्यावरण तथा पशु संरक्षण से भी जोड़ा। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में श्रीमती मेनका गांधी के प्रयासों का उल्लेख करते हुए दिल्ली में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने हेतु न्यायालय के निर्देशों के बाद सार्वजनिक परिवहन को सीएनजी में परिवर्तित किए जाने का उदाहरण भी दिया। उन्होंने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण जैसी संवैधानिक व्यवस्थाओं को सामाजिक न्याय की दिशा में एक प्रभावी कदम बताया।
न्यायमूर्ति श्री ललित ने तीन तलाक कानून पर बेहद संक्षिप्त एवम् सारगर्भित बोलते हुए कहा, न्यायपालिका की ओर से तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित करने से मुस्लिम महिलाओं को न्याय, सम्मान और समान अधिकार प्राप्त हुए, जिससे उनकी राष्ट्र निर्माण में भागीदारी और अधिक सशक्त हुई। उल्लेखनीय है, तीन तलाक कानून को असंवैधानिक पारित करने वाली पांच सदस्यीय बेंच में न्यायमूर्ति श्री यूयू ललित भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्तर तक निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया जाना लोकतंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय है, जिससे प्रत्येक बच्चे को शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित हुआ है। शिक्षा क्षेत्र में निजी संस्थानों की भागीदारी से शिक्षा के अवसरों का विस्तार हुआ है, जिससे स्टुडेंट्स को बेहतर संसाधन एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो रही है। टाक सीरीज-18 में प्रो. एमपी सिंह, प्रो. नवनीत कुमार, प्रो. सुशील सिंह, डॉ. अमित कंसल के संग-संग लॉ, एलाइड हैल्थसाइंसेज़ कॉलेज आदि के स्टुडेंट्स भी मौजूद रहे। टाक सीरीज में स्टुडेंट्स ने न्यायमूर्ति श्री उदय उमेश ललित से सवाल भी पूछे। संचालन डॉ. नेहा आनन्द ने किया।।

