शिवांगी गंगवार बनी कुर्मी महासभा की प्रदेश अध्यक्ष – केंद्रीय अध्यक्ष सौरभ गंगवार ने की घोषणा
रूद्रपुर। सामाजिक संगठन कुर्मी महासभा के केंद्रीय अध्यक्ष सौरभ गंगवार ने संगठन को विस्तार देते हुए श्रीमती शिवांगी गंगवार को उत्तराखंड प्रदेश अध्यक्ष के पद पर मनोनीत किया है। इस नियुक्ति की आधिकारिक घोषणा करते हुए केंद्रीय अध्यक्ष ने विश्वास जताया कि यह निर्णय प्रदेश में संगठन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में सहायक सिद्ध होगा।
शिवांगी गंगवार की नियुक्ति के पीछे उनके लंबे समय से किए जा रहे सामाजिक कार्यों और कुर्मी समाज के प्रति उनकी अटूट निष्ठा को मुख्य आधार माना गया है। सौरभ गंगवार ने कहा कि शिवांगी गंगवार ने सदैव संगठन की नीतियों को धरातल पर उतारने में सक्रिय भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्व क्षमता और समर्पण को देखते हुए ही उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। संगठन को उम्मीद है कि उनके पदभार संभालने से महासभा के उद्देश्यों और सामाजिक कल्याण की योजनाओं को जन-जन तक पहुँचाने में गति आएगी और समाज का प्रत्येक वर्ग खुद को संगठन से जुड़ा हुआ महसूस करेगा।
इस मनोनयन पर हर्ष व्यक्त करते हुए संगठन के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी शिवांगी गंगवार को बधाई दी। पदाधिकारियों का मानना है कि एक ऊर्जावान नेतृत्व के आने से समाजहित के कार्यों को न केवल नई दिशा मिलेगी, बल्कि युवाओं और महिलाओं की भागीदारी भी संगठन में बढ़ेगी। सौरभ गंगवार ने इस दौरान संगठन के मूल मंत्र को दोहराते हुए कहा कि महासभा का मुख्य लक्ष्य समाज का उत्थान, आपसी एकता और सशक्तिकरण है। उन्होंने जोर दिया कि प्रदेश अध्यक्ष की भूमिका इन लक्ष्यों को प्राप्त करने और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगी।
संगठन के विस्तार की चर्चा के साथ ही केंद्रीय अध्यक्ष सौरभ गंगवार ने उत्तराखंड में ओबीसी वर्ग के सामने आ रही गंभीर प्रशासनिक समस्याओं को लेकर भी आवाज उठाई है। उन्होंने प्रदेश में ओबीसी जाति प्रमाण पत्र के नवीनीकरण की व्यवस्था को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। गंगवार ने स्पष्ट किया कि वर्तमान नियमों के अनुसार ओबीसी वर्ग के नागरिकों को हर तीन साल में अपना जाति प्रमाण पत्र रिन्यू कराना पड़ता है, जिससे समाज के लोगों को अनावश्यक मानसिक और प्रशासनिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने इस मुद्दे पर राजनीतिक उदासीनता को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह बेहद चिंताजनक है कि उत्तराखंड विधानसभा में 70 विधायक होने के बावजूद, पिछड़ा वर्ग की इस ज्वलंत समस्या को सदन में प्रभावी ढंग से नहीं उठाया गया। उन्होंने इसे सीधे तौर पर ओबीसी समाज के हितों की अनदेखी बताया और सरकार से इस नियम में तत्काल सुधार कर व्यवस्था को सरल बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि कुर्मी महासभा समाज के हकों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी और युवाओं को संगठित कर इस लड़ाई को और तेज किया जाएगा।।

