कटियाबाज़ अध्यक्षः सबका साथ-सबका विकास या ‘चोरी की बिजली से खुद का विकास’ ?
कटियाबाज़ अध्यक्षः सबका साथ-सबका विकास या ‘चोरी की बिजली से खुद का विकास’ ?
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
रुद्रपुर। उत्तराखंड में ‘जीरो टॉलरेंस’ का नारा बुलंद करने वाली भाजपा की साख पर उसके अपने ही सिपहसालार ने ‘कटिया’ डाल दी है। रुद्रपुर के सरदार पटेल मंडल अध्यक्ष धीरेश गुप्ता के कार्यालय परिसर में विद्युत विभाग और विजिलेंस की छापेमारी ने न केवल एक नेता की कलई खोली है, बल्कि सत्ता के संरक्षण में चल रहे अवैध खेल को भी सार्वजनिक कर दिया है।
बीती 30 जनवरी को जब एसडीओ अन्नू अरोरा के नेतृत्व में टीम ट्रांजिट कैंप क्षेत्र में उतरी, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की आंच सीधे संगठन के पदाधिकारी तक पहुंचेगी मंडल अध्यक्ष धीरेश गुप्ता के परिसर में 10 मीटर लंबी केबल के जरिए जो बिजली खींची जा रही थी, वह केवल सरकारी राजस्व की चोरी नहीं थी, बल्कि उन आम उपभोक्ताओं के साथ भद्दा मजाक था जो ईमानदारी से अपने बिल भरते हैं। मौके से बरामद केबल और एफआईआर में दर्ज मोबाइल नंबर इस बात के पुख्ता प्रमाण हैं कि यह कोई तकनीकी चूक नहीं, बल्कि सोची-समझी चोरी थी।
धीरेश गुप्ता कोई साधारण कार्यकर्ता नहीं हैं। वह दूसरी बार मंडल अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और पूर्व में नामित पार्षद जैसे गरिमामय पद पर रह चुके हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या पार्टी के पद अब कानून से ऊपर होने का लाइसेंस बन गए हैं? जिस ट्रांजिट कैंप थाने में उन्होंने कभी धमक के साथ पैर रखे होंगे, आज वहीं उनके खिलाफ बिजली चोरी की धाराओं में मुकदमा दर्ज है।
अब निगाहें भाजपा जिलाध्यक्ष के अगले कदम पर टिकी हैं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि क्या संगठन अपने इस दागी पदाधिकारी पर अनुशासन की गाज गिराएगा या फिर मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया जाएगा?
बहरहाल सत्ता पक्ष के नेताओं द्वारा इस तरह की करतूतें जनता के बीच गलत संदेश भेजती हैं। धीरेश गुप्ता पर दर्ज एफआईआर केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि भाजपा के लिए एक ‘लिटमस टेस्ट’ है। यदि नैतिकता के आधार पर तत्काल इस्तीफा या निष्कासन नहीं होता, तो विपक्षी दलों को यह कहने का मौका मिल जाएगा कि भाजपा में ‘अपराध और भ्रष्टाचार’ को सत्ता का कवच प्राप्त है।।

