ऊधम सिंह नगर

राज्यसभा में मिशन वात्सल्य पर उठे सवाल, केंद्र ने दी विस्तृत जानकारी

सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान 

नई दिल्ली। भाजपा के राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद डा. नरेश बंसल ने राज्यसभा में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की महत्वाकांक्षी योजना मिशन वात्सल्य को लेकर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए। उन्होंने बच्चों की देखभाल, वात्सल्य सदनों की स्थिति तथा लापता बच्चों के ट्रैकिंग सिस्टम से जुड़े तीन प्रमुख बिंदुओं पर सरकार से जानकारी मांगी।

सांसद ने पूछा कि परिवार आधारित गैर-संस्थागत देखभाल को बढ़ावा देने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं, देशभर में कितने वात्सल्य सदन स्थापित किए गए हैं, तथा ट्रैक चाइल्ड पोर्टल और मिशन वात्सल्य पोर्टल के एकीकरण की क्या प्रगति है।

इन प्रश्नों के उत्तर में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने विस्तृत जानकारी दी।

मंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के माध्यम से मिशन वात्सल्य संचालित कर रही है, जिसके तहत देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों तथा कानून का उल्लंघन करने वाले बच्चों के लिए संस्थागत और गैर-संस्थागत दोनों प्रकार की सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि योजना का मुख्य उद्देश्य बच्चों को परिवार आधारित देखभाल देना है और संस्थागत देखभाल को अंतिम विकल्प के रूप में रखा गया है।

गैर-संस्थागत देखभाल के तहत बच्चों को प्रायोजन, पालन-पोषण (फोस्टर केयर), दत्तक ग्रहण और पश्चात देखभाल जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। पात्र बच्चों को इस योजना के अंतर्गत प्रति माह 4000 रुपये की आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाती है।

वात्सल्य सदनों के संबंध में मंत्री ने बताया कि देशभर में अब तक कुल 69 वात्सल्य सदनों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनका राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशवार विवरण अलग से उपलब्ध कराया गया है।

लापता बच्चों के मामलों पर जानकारी देते हुए मंत्री ने कहा कि मिशन वात्सल्य पोर्टल को एकीकृत रूप में विकसित किया गया है, जिसमें ट्रैक चाइल्ड पोर्टल, खोया-पाया एप्लीकेशन और केयरिंग्स (दत्तक ग्रहण) पोर्टल को जोड़ा गया है। यह प्रणाली गृह मंत्रालय, रेल मंत्रालय, राज्य सरकारों, बाल कल्याण समितियों और अन्य संस्थाओं के समन्वय से संचालित हो रही है।

उन्होंने बताया कि ट्रैक चाइल्ड पोर्टल को क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग एंड नेटवर्क सिस्टम (CCTNS) से भी जोड़ा गया है, जिससे गुमशुदा बच्चों से संबंधित एफआईआर का मिलान करना आसान हो गया है। साथ ही, आम नागरिक भी खोया-पाया मॉड्यूल के माध्यम से लापता या देखे गए बच्चों की सूचना दे सकते हैं।

मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि लापता बच्चों के मामलों की निगरानी के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएं, जिनका विवरण मिशन वात्सल्य पोर्टल पर उपलब्ध है।।

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