Monday, August 10, 2026
Latest:
ऊधम सिंह नगर

सिस्टम पर भारी सेटिंग-गेटिंग, 7 साल से एक ही कुर्सी पर ‘कुंडली’ – यूपीसीएल में स्थानांतरण नीति को ठेंगा – 2018 से एक स्थान पर जमे हैं अधीक्षण अभियंता मो0 सलीम

सिस्टम पर भारी सेटिंग-गेटिंग, 7 साल से एक ही कुर्सी पर ‘कुंडली’

– यूपीसीएल में स्थानांतरण नीति को ठेंगा

– 2018 से एक स्थान पर जमे हैं अधीक्षण अभियंता मो0 सलीम

सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान 

रुद्रपुर। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) में स्थानांतरण के नियम और सरकारी गाइडलाइंस कोरे साबित हो रहे हैं। विभाग की पारदर्शिता और कार्यकुशलता पर उस वक्त सवालिया निशान लग जाते हैं, जब एक ही अधिकारी अपनी रसूख और सेटिंग-गेटिंग के दम पर वर्षों तक एक ही महत्वपूर्ण पद पर काबिज रहता है। ताजा मामला विद्युत जनपद खंड रुद्रपुर का है, जहाँ तैनात अधीक्षण अभियंता मो. सलीम पिछले सात वर्षों से एक ही कार्यालय में जमे हुए हैं। विभाग के स्पष्ट नियमों के बावजूद उनका यहां से टस से मस न होना चर्चा का विषय बना हुआ है।

उत्तराखंड शासन और विभाग की स्थानांतरण नीति के अनुसार, किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को एक निश्चित स्थान पर अधिकतम तीन वर्ष तक की सेवाएं देने का प्रावधान है। इस नीति का उद्देश्य प्रशासनिक पारदर्शिता बनाए रखना और भ्रष्टाचार की संभावनाओं को कम करना है। विडंबना यह है कि वर्ष 2018 से रुद्रपुर कार्यालय में तैनात मो. सलीम के मामले में यह नियम पूरी तरह बौना साबित हो रहा है। सात साल बीत जाने के बाद भी उनका स्थानांतरण न होना विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

अधीक्षण अभियंता मो. सलीम के पास न केवल रुद्रपुर की जिम्मेदारी है, बल्कि हल्द्वानी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र का अतिरिक्त कार्यभार भी इन्हीं के पास है। दो बड़े क्षेत्रों का प्रभार एक ही व्यक्ति के पास होने से विभागीय कार्यों की गति धीमी पड़ गई है। महत्वपूर्ण फाइलों का निस्तारण समय पर नहीं हो पा रहा है और तकनीकी समस्याओं के समाधान में अनावश्यक विलंब हो रहा है। विभागीय जानकारों का मानना है कि एक ही अधिकारी के पास अत्यधिक कार्यभार होने से प्रशासनिक नियंत्रण ढीला पड़ता है, जिसका सीधा असर विभाग की उत्पादकता पर पड़ता है।

अधिकारी की इस लंबी पारी और दोहरे कार्यभार का सबसे बुरा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। रुद्रपुर और हल्द्वानी दोनों ही क्षेत्रों के विद्युत उपभोक्ता विभागीय लेटलतीफी और शिकायतों के समय पर निस्तारण न होने से परेशान हैं। जब अधिकारी एक ही स्थान पर लंबे समय तक टिक जाता है, तो जनसुनवाई और जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशीलता कम होने लगती है। बिजली बिलों की गड़बड़ी हो या नए कनेक्शन की फाइलें, उपभोक्ताओं को साहब के समय का इंतजार करना पड़ता है।

गलियारों में चर्चा है कि मो. सलीम अपनी ऊँची पहुंच और प्रभावी नेटवर्किंग के कारण हर साल होने वाले तबादलों की सूची से अपना नाम बाहर रखवाने में सफल हो जाते हैं। सात सालों का यह कार्यकाल यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या यूपीसीएल में नियमों से ऊपर भी कोई शक्ति काम कर रही है?

error: Content is protected !!
Call Now Button