मोक्षदायिनी गंगा की पवित्रता पर आघात, उद्गम जनपद में ज्ञानसू सीवर प्लांट सवालों के घेरे में पौराणिक आस्था बनाम आधुनिक लापरवाही, उद्गम जनपद में गंगा प्रदूषण का गंभीर मामला
मोक्षदायिनी गंगा की पवित्रता पर आघात, उद्गम जनपद में ज्ञानसू सीवर प्लांट सवालों के घेरे में
पौराणिक आस्था बनाम आधुनिक लापरवाही, उद्गम जनपद में गंगा प्रदूषण का गंभीर मामला
रिपोर्ट।दीक्षा गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
उत्तरकाशी। मां गंगा के उद्गम जनपद उत्तरकाशी में गंगा की पवित्रता के साथ गंभीर खिलवाड़ का मामला सामने आया है। जिला मुख्यालय से सटे ज्ञानसू क्षेत्र स्थित सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाला मल-मूत्र युक्त गंदा पानी बिना समुचित शोधन के सीधे मां गंगा में प्रवाहित किया जा रहा है। इस स्थिति को लेकर स्थानीय नागरिकों, तीर्थ पुरोहितों और सामाजिक संगठनों में भारी रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि जिस गंगा में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं, उसी गंगा को उसके उद्गम जनपद में ही प्रदूषित किया जा रहा है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मां गंगा का अवतरण राजा भगीरथ की कठोर तपस्या के फलस्वरूप हुआ था। भगवान शिव ने गंगा के प्रचंड वेग को अपनी जटाओं में धारण कर पृथ्वी पर अवतरित किया, ताकि मानवता का कल्याण हो सके। गंगोत्री से निकलकर उत्तरकाशी की धरती से प्रवाहित होने वाली यह नदी केवल जलधारा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और मोक्ष का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे पवित्र उद्गम जनपद में ही गंगा का प्रदूषित होना धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों पर सीधा आघात माना जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ज्ञानसू क्षेत्र में सीवर का गंदा पानी खुलेआम गंगा में मिलते देखा जा सकता है। दुर्गंध और गंदगी के कारण गंगा किनारे धार्मिक अनुष्ठान और स्नान भी प्रभावित हो रहे हैं। आगामी हरिद्वार महाकुंभ को देखते हुए यह मामला और भी गंभीर हो जाता है, क्योंकि करोड़ों श्रद्धालु गंगा को निर्मल स्वरूप में देखने की अपेक्षा रखते हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उप जिलाधिकारी देवानंद शर्मा ने तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि ज्ञानसू सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से गंगा में प्रवाहित हो रहे अपशिष्ट को लेकर संबंधित विभागों को तुरंत निर्देशित किया जाएगा। सीवर ट्रीटमेंट की पूरी प्रक्रिया को दुरुस्त किया जाएगा और किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उप जिलाधिकारी ने बताया कि मीडिया के माध्यम से यह विषय संज्ञान में आया है, जिसके बाद मामले का तकनीकी परीक्षण कराया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि गंगा प्रदूषण को लेकर सरकार पूरी तरह गंभीर है और जिला प्रशासन भी इस विषय को अत्यंत प्राथमिकता से ले रहा है। इस प्रकरण में जिन अधिकारियों या विभागों की जिम्मेदारी तय होगी, उन्हें आवश्यक निर्देश जारी किए जाएंगे और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने आगे कहा कि प्रत्येक माह जिला गंगा समिति की नियमित बैठक आयोजित की जाती है और इस प्रकरण को भी आगामी बैठक में प्रमुखता से रखा जाएगा। इसके साथ ही गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई, बड़कोट को भी तत्काल निर्देशित किया जाएगा, ताकि मौके पर आवश्यक जांच और सुधारात्मक कार्रवाई शीघ्र सुनिश्चित की जा सके।
इस अवसर पर स्वयं मौके पर मौजूद मां गंगा के तीर्थ पुरोहित एवं पांच मंदिर समिति के अध्यक्ष हरीश सेमवाल ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि ज्ञानसू क्षेत्र में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाला मल-मूत्र सीधे मां गंगा में प्रवाहित किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। उन्होंने कहा कि इससे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को गहरी ठेस पहुंच रही है और उद्गम जनपद में ही गंगा का इस तरह प्रदूषित होना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
हरीश सेमवाल ने इसे संबंधित अधिकारियों की घोर लापरवाही करार देते हुए कहा कि गंगा जैसी पवित्र और मोक्षदायिनी नदी के प्रति इस तरह का रवैया शर्मनाक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते ठोस और स्थायी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह न केवल धार्मिक आस्था पर आघात करेगा, बल्कि भविष्य में इसके गंभीर सामाजिक और पर्यावरणीय परिणाम भी सामने आएंगे।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस गंभीर मुद्दे पर प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। वरिष्ठ समाजसेवी दिनेश पंवार ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मां गंगा अपने ही उद्गम जनपद उत्तरकाशी में अपवित्र की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि ज्ञानसू सहित विभिन्न स्थानों पर स्थापित सीवर ट्रीटमेंट प्लांटों से निकलने वाले मल-मूत्र का कोई वैज्ञानिक निस्तारण नहीं किया जा रहा है और उसे सीधे मां गंगा में बहाया जा रहा है, जो पर्यावरण के साथ-साथ धार्मिक आस्था दोनों के लिए गंभीर खतरा है।
दिनेश पंवार ने बताया कि यह स्थिति केवल ज्ञानसू तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तरकाशी से लेकर गंगोत्री तक जहां-जहां सीवर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित हैं, लगभग सभी स्थानों पर हालात चिंताजनक बने हुए हैं। कई जगहों पर सीवर का अशोधित पानी सीधे गंगा में छोड़ा जा रहा है, जिससे गंगा की पवित्रता और स्वच्छता पर लगातार संकट गहराता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार द्वारा मां गंगा की स्वच्छता के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। यदि प्रशासन और संबंधित अधिकारी इस विषय को गंभीरता से लेते, तो सीवर ट्रीटमेंट प्लांटों के माध्यम से जैविक खाद तैयार की जा सकती थी और आवश्यक रासायनिक प्रक्रियाओं का प्रयोग कर गंदे पानी का समुचित शोधन किया जा सकता था। लेकिन स्थिति यह है कि न तो केमिकल का प्रयोग किया जा रहा है और न ही प्लांटों का संचालन निर्धारित मानकों के अनुसार किया जा रहा है।
दिनेश पंवार ने आरोप लगाया कि अपनी सुविधा के लिए कई जगहों पर सीवर ट्रीटमेंट प्लांट को दरकिनार कर सीधे मल-मूत्र को गंगा में बहाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस लापरवाही पर रोक नहीं लगी, तो इसके दुष्परिणाम आने वाली पीढ़ियों को भुगतने पड़ेंगे। उन्होंने मां गंगा को बचाने के लिए समाज के सभी वर्गों, धार्मिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों से एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की।
जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की तकनीकी खामियों को दूर नहीं किया गया, तो इसका दुष्प्रभाव आगे चलकर गंगोत्री से लेकर हरिद्वार तक गंगा की स्वच्छता पर पड़ेगा। गंगा को जीवनदायिनी और मोक्षदायिनी मानने वाली भारतीय संस्कृति में उद्गम क्षेत्र पर ही इस तरह की लापरवाही गंभीर चिंता का विषय है।
फिलहाल प्रशासन द्वारा जांच की बात कही जा रही है, लेकिन यह स्थिति अपने आप में बेहद चिंताजनक है। सवाल यह है कि क्या यह मामला भी पूर्व की तरह जांच, बैठकों और फाइलों तक सीमित रह जाएगा, या फिर वास्तव में मां गंगा को उनके उद्गम जनपद उत्तरकाशी में प्रदूषण से बचाने के लिए ठोस और स्थायी कार्रवाई होगी। जिस गंगा को सनातन संस्कृति में जीवन, शुद्धता और मोक्ष का आधार माना गया है, यदि वही अपने जन्मस्थल पर ही दूषित होती रहे, तो यह केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सामूहिक विफलता कही जाएगी।
गंगा की पवित्रता को लेकर उठी यह चिंता शासन और प्रशासन के दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है। स्वच्छ गंगा के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जमीनी स्तर पर यदि हालात बद से बदतर बने हुए हैं, तो यह भविष्य के लिए खतरे की घंटी है। यदि अब भी निर्णायक और कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो इसका खामियाजा न केवल पर्यावरण को, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी भुगतना पड़ेगा।

