ऊधम सिंह नगर

नक्शा पास कराये बिना धड़ल्ले से हो रहे निर्माण सरकार को हो रहा राजस्व का घाटा, कार्रवाई के नाम पर होती है खानापूर्ति

सौरभ गंगवार

रूद्रपुर। जनपद के शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र में नियम-कायदों को ताक पर रखकर बड़ी संख्या में आवासीय एवं व्यावसायिक भवन निर्माण कार्य बिना परमिशन व नक्शा स्वीकृत कराए धड़ल्ले से हो रहा है। जिससे जहां एक तरफ सरकार को लाखों रुपए का राजस्व का घाटा उठाना पड रहा है, वहीं दूसरी तरफ अनियोजित बसाहट के कारण शहर गांव एवं कसबों की सूरत बिगड़ने के साथ ही आमजन की परेशानियां बढ़ती जा रही है। विकास प्राधिकरण निर्माण से संबंधित नियमों को लागू कराने में नाकाम साबित हो रहा है। आलम यह है कि नक्शा पास कराये बिना ही कुछ बाजारों एवं तमाम कालोनियों में धड़ल्ले से निर्माण किये जा रहे हैं। इनमें रेरा के मानकों को भी ताक पर रखा जा रहा है। जिम्मेदार अधिकारी खुद स्थिति से वाकिफ होने के बावजूद कर्तव्य से पल्ला झाड़ लेते हैं।

बता दें अनियोजित विकास को रोकने के लिए जिले में विकास प्राधिकरण बनाया गया है। जिले में अतिक्रमण की भरमार और भवनों के अनियोजित निर्माण को देखते हुए ही ऊधमसिंह नगर विकास प्राधिकरण की जरूरत महसूस की जा रही थी जिसके चलते शासन के निर्देश पर उसका खाका तैयार कर प्राधिकरण बनाया गया प्राधिकरण के अस्तित्व में आते ही जनपद में प्राधिकरण से बगैर नक्शा पास कराये भवन निर्माण कार्य कराने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गयी थी शासन ने बगैर नक्शा पास कराये कोई भी निर्माण होने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश भी जिला प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों को दिये थे प्राधिकरण के अस्तित्व में आने के बाद भी अनियोजित विकास की स्थिति में अधिक सुधार नहीं आया है। नगर एवं ग्रामीण अंचलों में अभी भी बिना नक्शा स्वीकृत कराये निर्माण हो रहे हैं।

बताया जाता है कि कई कालोनियां भी विकसित की जा रही है। इन कालोनियों में नियमानुसार नक्शे स्वीकृत नहीं है। कुछ माह पूर्व ऐसे निर्माण कार्यों के खिलाफ प्राधिकरण ने सख्त कदम उठाकर कुछ भवन सील भी किये थे लेकिन यह कार्रवाई महज खानापूर्ति ही साबित हुई। प्राधिकरण की निष्क्रियता के चलते लोग भवन निर्माण में नक्शा पास कराने की जरूरत को कोई खास अहमियत नहीं दे रहे हैं। खासकर रसूखदार लोग जुगाड़ लगाकर बिना नक्शा पास कराये निर्माण करा रहे हैं। यह हाल तब है जबकि उधम सिंह नगर को भूकम्प की दृष्टि से जोन 5 में रखा गया है। लोग नक्शा पास कराने को जिम्मेवारी न मानकर एक मजबूरी समझ रहे हैं। हालाकि प्राधिकरण बनने के बाद नक्शा पास कराने वालों की संख्या में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुयी है। प्राधिकरण के पास संसाधनों की कमी के चलते नक्शे पास कराने में अनावश्यक देरी के चलते भी लोग नक्शा पास कराने से बच रहे हैं। मकान बनाने के लिए लोग प्राइवेट इंजीनियर से नक्शा तो बनवाते हैं नियमानुसार नक्शे को स्वीकृत कराना अनिवार्य होता है।

लेकिन पैसे बचाने के लालच में लोग बनवाए गए नक्शे को पास नहीं करवातें। बिना परमिशन मनमर्जी से भवन निर्माण कराते हैं। जो लोग नक्शा पास करवाते हैं उनमें से भी तमाम लोग ऐसे है। जोा नक्शे के अनुसार काम नहीं करवाते हैं। स्वीकृत नक्शे के बजाय निर्माण का दायरा बढ़ाकर सड़क व आसपास की खाली जमीन पर भी मकान खड़े किए जा रहे हैं। ऐसे में नक्शा पास कराना और नहीं कराना बराबर हो जाता है। भवन निर्माण करा रहे कई लोगों का कहना है कि प्राधिकरण से परमिशन आसानी से नहीं मिलती है। आवेदकों को अधिकारी -कर्मचारी कार्यालय के कई चक्कर कटवाते हैं। इसी झंझट के चलते लोग भवन बनाने से पहले अनुमति लेने से बचते हैं। यह भी शिकायत है कि बिना परमिशन भवन निर्माण के मामलों में कार्रवाई के नाम पर संबंधित कर्मचारी सुविधा शुल्क लेकर खामोश हो जाते हैं। इसलिए लिए तमाम लोग भवन बनाने से पूर्व नक्शा पास कराने की अनिवार्यता को देखते हुए नक्शा पास तो करा लेते हैं, लेकिन परमिशन के लिए लगाई गई शर्तों का पालन कराने पर जिम्मेदार अधिकारी ध्यान नहीं देते हैं। आमतौर पर भवन निर्माता को भी इस बात से कोई सरोकार नहीं होता है कि मकान बनाते समय कहां कितनी जगह छोडना जरूरी है, पानी का निकास कहां से करना है,छत का पानी कहां गिरना चाहिए लोगों की कोशिश रहती है कि उनकी एक इंच भी जगह भी नहीं छूटना चाहिए और सरकारी जगह को भी अपने हिस्से में लिया जाए इस लालच में भवनों के हिस्से सडक तक आ जाते हैं,जिससे दूसरे लोगों के लिए कई समस्याएं पैदा होती है।

नक्शे पास होने में देरी से लोग परेशान
रूद्रपुर। रुद्रपुर विकास प्राधिकरण में नक्शे पास कराने के लिए लम्बी कतार लगी है। नक्शे पास कराने का काम धीमी गति से होने के कारण लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। लोग नक्शे पास कराने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। नक्शे पासा कराने में आ रही दिक्कतों के चलते ही तमाम लोग बिना नक्शे पास कराये ही मकान बनाने का रिस्क ले रहे हैं।

सरकार को हो रहा है राजस्व का घाटा
रूद्रपुर। विकास प्राधिकरण गठन के पीछे सरकार का मकसद अनियोजित विकास को रोकने के साथ साथ राजस्व से आय प्राप्त करना भी था लेकिन नक्शा पास कराने में लोगों की अधिक रूचि नहीं होने के कारण सरकार को राजस्व का घाटा उठाना पड रहा है। परमिशन और नक्शा स्वीकृत कराए बिना मकान-दुकान बनाने का सीधा नुकसान राजस्व घाटे के रूप में उठाना पड़ता है। जब नक्शा स्वीकृत नहीं होगा,तो न तो परमिशन शुल्क मिलेगा और न ही आगे चलकर संपत्तिकर की राशि मिलेगी इससे सरकार को लाखों रुपए के राजस्व की चपत लग रही है।

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