ऊधम सिंह नगर

आवास विकास में भ्रष्टाचार की नई सड़क! सड़क निर्माण में बड़ा खेल, सरकारी खजाने की खुलेआम बर्बादी

सौरभ गंगवार 

रूद्रपुर। भाजपा सरकार में सरकारी खजाने की कैसे बर्बादी की जाती है इसकी बानगी देखनी है तो रूद्रपुर के आवास विकास चले आईये। भाजपा के जनप्रतिनिधि भ्रष्टाचार खत्म करने और विकास के बड़े -बड़े दावे करते नहीं थकते लेकिन आवास विकास में 1 करोड़ 63 लाख की लागत से बन रही सड़क बड़े भ्रष्टाचार का इशारा कर रही है। करीब सवा किमी लम्बी इस सड़क के निर्माण में गड़बड़झाला साफ नजर आ रहा है। डामर या सीमेंटेड बनाये जाने के बजाय इस सड़क को इंटर लॉकिंग ब्लाक से बनाकर खानापूर्ति की जा रही है। 

आवास विकास रूद्रपुर की सबसे पुरानी वीआईपी कालोनियों में शुमार है। एक समय था जब इस कालोनी को सबसे वीआईपी कालोनी माना जाता था और यहां पर सड़क नालियों सहित हर व्यवस्था चाक चौबंद नजर आती थी। लेकिन आज यह क्षेत्र विकास की दौड़ में बहुत पीछे नजर आ रहा है। सिडकुल बनने के बाद अन्य इलाकों की तरह आवास विकास की आबादी भी काफी बढ़ चुकी है। आज आवास विकास आवासीय क्षेत्र के बजाय एक व्यवसायिक केन्द्र बन चुका है। आवास विकास की जो गलियां कभी शांत रहा करती थी अब इन गलियों में हर समय कोलाहल और भागदौड़ नजर आती है। वाहनों की भागम भाग का बोझ उठाने में आवास विकास की सड़कें असहाय सी मालूम पड़ती है। आवास विकास क्षेत्र की कई सड़कें वर्तमान मे बदहाल हैं। कुछ सड़कों का निर्माण वर्षों से नहीं हो पाया है। करीब बीस साल बाद आवास विकास के मुख्य मार्ग के निर्माण की मंजूरी तो मिल गयी लेकिन इसका निर्माण शुरू होने से पहले ही भ्रष्टाचार पटकथा भी लिख दी गई।

आवास विकास मुख्य मार्ग बृहस्पति देव मंदिर से पुलिस लाईन तक करीब सवा किमी लम्बा है।पूर्व में यह सड़क डामर से बनायी गयी थी। लेकिन आज इसे डामर से बनाने के बजाय इंटरलॉकिंग टायल बिछाकर महज खानापूर्ति की जा रही है। रूद्रपुर शहर में इंटरलॉकिंग टायल से बनने वाली इतनी बड़ी शायद यह पहली सड़क है। इससे पहले इतनी लंबी सड़क को इंटर लॉकिंग टायल से पहले कभी नहीं बनाया गया। वैसे भी रूद्रपुर में अब तक जो भी इंटर लॉकिंग टायल्स रोड बनी हैं, वह सब फेल हुयी है। उदाहरण के लिए सुविधा होटल से सुभाष कालोनी जाने वाल मार्ग और जनता इंटर कालेज रोड से आदर्श कालोनी घास मण्डी को जाने वाले मार्ग की हालत देख लीजिये, दोनों ही सड़कों पर बिछायी गयी टॉयल्स की हालत निर्माण के कुछ समय बाद ही खराब होने लगी। दरअसल इंटर लॉकिंग टायल्स रोड को आम तौर पर फुटपाथ के निर्माण के लिए प्रयोग किया जाता है। क्यों कि भारी वजन झेलने की क्षमता इंटर लॉकिंग टायल्स रोड में नहीं होती। छोटे वाहन या फिर पैदल चलने वालों के लिए टायल्स रोड ठीक मानी जाती है। या कालोनियों की आंतरिक सड़कों के लिए इस सड़क को बेहतर माना जाता है। लेकिन आवास विकास में करीब सवा किमी लम्बी मुख्य सड़क को हॉट मिक्स डामर रोड से इंटरलॉकिंग टाइल्स में तब्दील करना किसी के गले नहीं उतर रहा है। 

आवास विकास की लाईफ लाईन से खिलवाड़

रूद्रपुर। आपको बता दें आवास विकास की मुख्य सड़क पर रोजाना हजारों लोगों का आवागमन होता है। यह सड़क आवास विकास के साथ साथ जगतपुरा, पुलिस लाईन, अटरिया मंदिर क्षेत्र की लाईफ लाईन मानी जाती है। चौबीस घंटे इस सड़क पर हल्के और भारी हर तरह के वाहनों का दबाव रहता है। इसके बावजूद इस सड़क को कम गुणवत्ता वाली सड़क बनाने के पीछे कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग की क्या मजबूरी हो सकती है यह समझ से परे हैं। 

टाइल्स रोड की लागत होती है कम

रूद्रपुर। जानकारों की मानें तो सड़क को डामर या सीमेंट बनाने के बजाय टायल्स से बनाने के पीछे बड़ा खेल है। दरअसल डामर या सीसी रोड बनाने पर बजट अधिक खर्च होता है। सड़क निर्माण के लिए 1 करोड़ 63 लाख रूपये का बजट स्वीकृत हुआ है। हालाकि इतने बजट में सीसी रोड या फिर हॉट मिक्स डामर रोड का निर्माण कराया जा सकता है लेकिन इसके पीछे का गणित कुछ और है। जानकारों की मानें तो महंगी सड़क बनाने पर ठेकेदार और अन्य को मुनाफा कम होता है, इसलिए कम से कम बजट में सड़क बनाकर बजट को ठिकाने लगाने का खेल खेला जा रहा है। दरअसल टाइल्स रोड के निर्माण की लागत डामर रोड और सीसी रोड की अपेक्षा कम होती है। इसमें निर्माण सामग्री भी कम इस्तेमाल होती है और लेबर चार्ज भी कम लगता है। टाइल्स रोड को रेते की एक परत डालकर सीधे उसमें बिछा दिया जाता है, न कोई सीमेंट की जरूरत और न ही किसी तरह की मशीनों की जरूरत पड़ती है। टाइल्स रोड को कम बजट वाली सड़क माना जाता है और वाहनों का अधिक दबाव हो तो यह यह साल दो साल भी मुश्किल से चल पाती है। आवास विकास जैसे व्यस्ततम इलाके की मुख्य सड़क को इस तरह की हल्की सड़क बनाकर सिर्फ एक तरह से खानापूर्ति की जा रही है। 

टाइल्स रोड नही होती कामयाब

रूद्रपुर। मुख्य मार्गों के लिए टाईल्स रोड अकसर कामयाब नहीं होती। इसके कई उदाहरण रूद्रपुर में ही देखने को मिल सकते हैं। इसके पीछे कारण यह है कि अधिक वाहनों के दबाव के कारण टाइल्स ब्लॉक दब जाते हैं। इसके बाद सड़क उबड़ खाबड़ हो जाती है। जिसके कारण पैदल चलने वाले लोगों को भी इनमें ठोकर लगने से गिरने का खतरा रहता है। जगह जगह से टाइल्स दबने के कारण कई बार वाहन भी इनमें दुर्घटनाग्रस्त होते हैं। इसके अलावा टाइल्स की गुणवत्ता की भी कोई गारंटी नहीं होती। हालाकि सरकार ने इसके लिए टाइल्स की स्ट्रेथ के मानक तय किये होते हैं, टाइल्स निर्माण करने वाली फर्म अलग अलग स्टैथ वाली टाइल्स बनाती है। 200 से अधिक स्टैंथ वाली टाइल्स की गुणवत्ता सही मानी जाती है लेकिन अंदर तक की जानकारी रखने वाले लोग बताते हैं कि टाइल्स बनाने वाली फर्म सैटिंग गैटिंग करके अधिक स्टैथ वाली टाइल्स का सैंपल दिखाकर कम स्ट्रैंथ वाली टाइल्स की सप्लाई कर देती है। देखने में आम तौर पर कम और ज्यादा स्टैªंथ वाली टाइलें एक जैसी ही लगती है, इन्हें केवल विशेष तरह की जांच के ही परखा जा सकता है। ऐसे में इन टाइलों को लगाकर बजट को ठिकाने लगाना ठेकेदार और उनके आकाओं के लिए आसान होता है। 

कांग्रेस का विरोध दिखावा साबित हुआ

रूद्रपुर। आवास विकास की मुख्य सड़क की गुणवत्ता को लेकर महानगर कांग्रेस अध्यक्ष सीपी शर्मा का विरोध ड्रामा साबित हुआ घटिया सड़क निर्माण के खिलाफ राजनीति चमकाने के लिए सड़क पर उतरे महानगर कांग्रेस अध्यक्ष सीपी शर्मा का विरोध एक घंटे भी नहीं चल पाया विरोध के दौरान उन्होंने दावे बड़े बड़े किये लेकिन कुछ ही घंटे बाद उनका विरोध ऐसे खत्म हो गया जैसे सब कुछ मैनेज हो गया हो महानगर अध्यक्ष सीपी शर्मा ने विरोध करते हुए साफ कहा था जब तब विधायक या लोक निर्माण विभाग के उच्चाधिकारी मौके पर आकर जनता को आश्वस्त नहीं करेंगे तब तक विरोध जारी रहेगा, लेकिन उनका यह ऐलान हवाई साबित हुआ वैसे भी कांग्रेस पहले भी जनहित के मुद्दों पर इस तरह की नौटंकी करती रही है। जनहित के मुद्दों का ठीक से ना उठा पाने के चलते ही कांग्रेस आज हाशिये पर जाने लगी है। 

और दब गयी व्यापारियों की आवाज

रूद्रपुर। सड़क निर्माण के खिलाफ आवास विकास के व्यापारियों की आवाज चंद घंटों के बाद ही दब गई या फिर दबा दी गयी ? आवास विकास की सड़क को टाइल्स सड़क बनाने के खिलाफ व्यापारी विरोध के लिए खड़े हुए ही थे कि कुछ देर बाद ही आवास विकास में श्रम विभाग ने दुकानों पर छापेमारी शुरू कर दी जिससे व्यापारियों में हड़कम्प मच गया और व्यापारी विरोध के बजाय अपनी दुकानों को छापेमारी से बचान की जुगत में लग गये कई लोगों का कहना है कि शायद विरोध को दबाने के लिए ही छापेमारी करायी गयी इसमें कितनी सच्चाई है इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। 

भाजपा का जोर कौन करेगा विरोध

रूद्रपुर। शहर में कांग्रेस हाशिये पर है और व्यापारियों को काम से फुर्सत नहीं है ऐसे में घटिया सड़क निर्माण के खिलाफ कोई आवाज उठाने को तैयार नही है। जबकि दबी जुबान से हर कोई इस सड़क को टाइल्स से बनाने के लिए भाजपा के जनप्रतिनिधियों और लोक निर्माण विभाग को कोस रहा है। आवास विकास के ही कई भाजपा नेता इस सड़क के निर्माण में हो रही मनमानी से नाराज है लेकिन कोई बोलने को तैयार नहीं है। आवास विकास क्षेत्र में दो वार्ड आते हैं, इनमें से एक वार्ड से पूर्व में कांग्रेस के रमेश कालड़ा पार्षद थे जबकि दूसरे वार्ड से भाजपा नेता राजेश जग्गा की पत्नी पार्षद रही है। रमेश कालड़ा भी अब भाजपा में शामिल हो चुके हैं, ऐसे में विरोध करने का साहस अब उनमें भी नहीं है। लोक निर्माण विभाग ने जिन ठेकेदारों को सड़क निर्माण का ठेका दिया है वो भी भाजपा के हैं। जिस फर्म से टाइल्स की सप्लाई हो रही है वो भी किसी भाजपा नेता की बताई जा रही है।

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