Tuesday, October 20, 2026
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ऊधम सिंह नगर

प्रमाण पत्रों के सत्यापन में खामियों पर लेखपाल संघ ने उठाए सवाल, डीएम को सौंपा ज्ञापन राजस्व उपनिरीक्षकों के निलंबन पर जताई नाराजगी, ऑनलाइन पोर्टल में सुधार और सत्यापन प्रक्रिया स्पष्ट करने की मांग

सौरभ गंगवार टुडे हिंदुस्तानरुद्रपुर। उत्तराखंड लेखपाल संघ की जनपद ऊधम सिंह नगर शाखा ने प्रमाण पत्रों के सत्यापन में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों और राजस्व उपनिरीक्षकों के निलंबन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। संघ ने ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में सुधार करने, दस्तावेजों के सत्यापन की जिम्मेदारी स्पष्ट करने और निलंबन की कार्रवाई पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
संघ के जिलाध्यक्ष पिंटू कुमार गौतम और महामंत्री इंदु भट्ट की ओर से दिए गए ज्ञापन में बताया गया कि 28 सितंबर 2026 को रुद्रपुर में आयोजित बैठक में प्रमाण पत्रों से संबंधित विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गई थी। इसके बाद छह बिंदुओं पर अपनी मांगें प्रशासन के समक्ष रखी गईं।निलंबन की कार्रवाई पर जताई आपत्ति
ज्ञापन में कहा गया है कि कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर जारी प्रमाण पत्रों के मामलों में राजस्व उपनिरीक्षकों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है। संघ का कहना है कि प्रमाण पत्रों के लिए आवेदन ऑनलाइन आवेदकों द्वारा किए जाते हैं और उनके साथ विभिन्न दस्तावेज संलग्न किए जाते हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर संबंधित अधिकारियों की आख्या के बाद प्रमाण पत्र जारी किए जाते हैं। ऐसे में संघ ने राजस्व उपनिरीक्षकों के निलंबन की कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए उसे समाप्त करने की मांग की है।

दस्तावेजों की सत्यता जांचना चुनौतीपूर्ण
संघ ने ज्ञापन में कहा कि आधार कार्ड, राशन कार्ड, परिवार रजिस्टर की नकल, बिजली बिल, हाउस टैक्स रसीद, विभागीय पत्र और बैंक पासबुक जैसे दस्तावेज अलग-अलग विभागों से संबंधित होते हैं। इनकी वास्तविकता की जांच राजस्व उपनिरीक्षक स्तर पर करना संभव नहीं है। संघ ने कहा कि दस्तावेजों की सत्यता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों की जिम्मेदारी निर्धारित की जानी चाहिए।अर्पण पोर्टल में तकनीकी सुधार की मांग
ज्ञापन में अर्पण सरकार पोर्टल की आवेदन प्रक्रिया में सुधार की जरूरत भी बताई गई है। संघ के अनुसार, पोर्टल पर पर्याप्त सत्यापन के बिना आवेदन किए जाने की संभावना बनी रहती है। इसे रोकने के लिए आधार कार्ड का ओटीपी अथवा ओटीपीआर के माध्यम से सत्यापन, बायोमेट्रिक जांच और लाइव फोटोग्राफ की व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है, जिससे फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल पर अंकुश लगाया जा सके।

ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्रों के सत्यापन पर उठाए सवाल
संघ ने ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्रों के संबंध में शासनादेश का हवाला देते हुए स्थानीय निरीक्षण और सत्यापन की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई है। ज्ञापन में कहा गया है कि निर्धारित निर्देशों के अनुसार सत्यापन तहसीलदार से निम्न स्तर पर नहीं कराया जाना चाहिए, लेकिन संघ के अनुसार इन निर्देशों का अनुपालन नहीं हो रहा है। संघ ने इस संबंध में राजस्व उपनिरीक्षकों के स्तर पर जांच नहीं कराए जाने की मांग की है।
प्रतिदिन 50 से 100 से अधिक आवेदन आने का दावा
ज्ञापन में कहा गया है कि जिले की कुछ तहसीलों के शहरी क्षेत्रों में राजस्व उपनिरीक्षकों के पास प्रतिदिन 50 से 100 या इससे अधिक प्रमाण पत्रों के आवेदन आते हैं। ऐसे में नियमित राजस्व कार्यों के साथ प्रत्येक आवेदन का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन करना कठिन हो जाता है।

संघ ने एक जनवरी 2026 से वर्तमान समय तक जारी प्रमाण पत्रों के भौतिक सत्यापन की आख्या प्रस्तुत करने संबंधी आदेशों पर भी आपत्ति जताई है। उसका कहना है कि बड़ी संख्या में प्रमाण पत्रों का भौतिक सत्यापन राजस्व उपनिरीक्षक या राजस्व निरीक्षक स्तर पर करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
संघ ने प्रशासन से मांग की है कि प्रमाण पत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया स्पष्ट की जाए, ऑनलाइन पोर्टल में आवश्यक तकनीकी सुधार किए जाएं और राजस्व उपनिरीक्षकों के निलंबन के मामलों पर पुनर्विचार किया जाए ज्ञापन की प्रतिलिपि राजस्व परिषद देहरादून, आयुक्त कुमाऊं मंडल नैनीताल, प्रदेश अध्यक्ष एवं महामंत्री तथा जिले के समस्त उपजिलाधिकारियों और तहसीलदारों को भी भेजी गई है।।

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