Thursday, October 8, 2026
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ऊधम सिंह नगर

मानव तस्करी के नेटवर्क पर कसेगा शिकंजा, पंतनगर में छह राज्यों का मंथन 09 अक्टूबर को राज्य स्तरीय मानव तस्करी सम्मेलन, अंतरराज्यीय-अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और साइबर तस्करी पर होगा मंथन

सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तानपंतनगर। मानव तस्करी की रोकथाम, पीड़ितों के सुरक्षित रेस्क्यू एवं प्रभावी पुनर्वास तथा अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए 09 अक्टूबर को पंतनगर में राज्य स्तरीय मानव तस्करी सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। सम्मेलन में उत्तराखंड समेत छह राज्यों के पुलिस अधिकारी, नेपाल की सामाजिक संस्था ‘मैती’ के प्रतिनिधि तथा पुलिस-प्रशासन, अर्द्धसैनिक बल, सुरक्षा एजेंसियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के करीब 134 प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।
सम्मेलन में उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों के एसएसपी/एसपी, 13 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के नोडल अधिकारी एवं प्रभारी, पुलिसकर्मी, बाल कल्याण पुलिस अधिकारी, श्रम, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग, बाल कल्याण समितियों तथा विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

कुमाऊं में सामने आए मानव तस्करी के मामले
सम्मेलन में उत्तराखंड में सामने आए मानव तस्करी के मामलों और उनमें पुलिस कार्रवाई से मिले अनुभवों एवं चुनौतियों पर भी चर्चा होगी। वर्ष 2018-19 में ऊधमसिंहनगर में नेपाल की 16 महिलाओं को मानव तस्करी कर भारत लाते समय सीमा क्षेत्र से रेस्क्यू किया गया था।
वर्ष 2021 में पिथौरागढ़ में मां और सौतेले पिता द्वारा दो नाबालिग बेटियों को करीब 90 हजार रुपये में राजस्थान के अजमेर के लोगों को बेचने का मामला सामने आया था। पुलिस ने दोनों नाबालिगों को बरामद कर लिया था।

 

वर्ष 2022 में ऊधमसिंहनगर में पुलिस ने ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया था, जो हरियाणा, दिल्ली और नेपाल से युवतियों को लाकर देह व्यापार में धकेल रहा था कार्रवाई के दौरान आरोपियों को गिरफ्तार कर तीन महिलाओं को मुक्त कराया गया
वर्ष 2023 में हल्द्वानी में एक नाबालिग बालिका को पुलिस ने बरामद किया जांच में उसके नशे के इंजेक्शन दिए जाने और मानव तस्करी एवं देह व्यापार से जुड़े नेटवर्क में धकेले जाने की बात सामने आई।

वर्ष 2025 में काशीपुर पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी नेटवर्क का खुलासा करते हुए नेपाल से नौकरी का झांसा देकर लाए गए 32 युवकों को एक मकान में बंधक बनाए जाने का मामला उजागर किया था।
इसके अलावा वर्ष 2025 में कुमाऊं क्षेत्र के युवाओं को आकर्षक नौकरी का झांसा देकर विदेश ले जाने और बाद में म्यांमार के साइबर स्कैम सेंटरों में पहुंचाकर साइबर ठगी के लिए मजबूर किए जाने के मामले भी सामने आए।

विशेषज्ञ साझा करेंगे अनुभव और सुझाव
सम्मेलन में मानव तस्करी की रोकथाम, पीड़ितों के रेस्क्यू और पुनर्वास के क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे। प्रस्तावित वक्ताओं में अपर पुलिस महानिरीक्षक अपराध एवं कानून व्यवस्था डॉ. वी. मुरुगेशन, पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं परिक्षेत्र श्रीमती निवेदिता कुकरेती, सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक एनडीआरएफ श्री पी.एम. नायर, एसडब्ल्यूआरसी एनजीओ बनबसा के संस्थापक/सचिव श्री जनक बहादुर चंद, मदद फाउंडेशन इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन के संस्थापक श्री राजेश मनी, जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन के नेशनल संयोजक एवं शक्ति वाहिनी के संस्थापक अधिवक्ता श्री रविकांत, संयुक्त निदेशक (विधि) श्री जी.सी. पंचोली, एपीओ सुश्री अपर्णा अवस्थी, हरिद्वार की वरिष्ठ उप निरीक्षक अंजु कुमार सिंह तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ऊधम सिंह नगर सहित अन्य अधिकारी एवं विशेषज्ञ शामिल होंगे।

सीमा और साइबर नेटवर्क पर रहेगा विशेष फोकस
पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं परिक्षेत्र श्रीमती निवेदिता कुकरेती के निर्देशन में सम्मेलन की तैयारियां की जा रही हैं। सम्मेलन में सीमा क्षेत्रों की निगरानी, अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय समन्वय, साइबर माध्यमों से होने वाली मानव तस्करी, पीड़ितों की पहचान और रेस्क्यू, सुरक्षित पुनर्वास तथा तस्करी में शामिल गिरोहों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई पर विशेष मंथन होगा।
उत्तराखंड पुलिस की ओर से मानव तस्करी के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत लगातार कार्रवाई की जा रही है। सम्मेलन का उद्देश्य विभिन्न राज्यों और एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर मानव तस्करी के नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाना और पीड़ितों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है।।

 

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