जिला स्तरीय चिन्हीकरण समितियों में सभी क्षेत्रों के आंदोलनकारियों को प्रतिनिधित्व देने की मांग
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
हल्द्वानी। संयुक्त उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष विनोद कुमार घड़ियाल ने राज्य आंदोलनकारियों की बैठक को संबोधित करते हुए जिला स्तरीय चिन्हीकरण समितियों के गठन में पारदर्शिता और सभी क्षेत्रों के आंदोलनकारियों को प्रतिनिधित्व दिए जाने की मांग उठाई।
घड़ियाल ने कहा कि पूरे उत्तराखंड के 13 जिलों में राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण के लिए जिला स्तरीय समितियां गठित की गई हैं, लेकिन इनमें कई क्षेत्रों के आंदोलनकारियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि समितियों में कुछ सीमित क्षेत्रों के लोगों को ही शामिल किया गया है, जिसके कारण दूरदराज के क्षेत्रों में सक्रिय रहे राज्य आंदोलनकारियों की पहचान और चिन्हीकरण प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने नैनीताल जिले का उदाहरण देते हुए कहा कि समिति में हल्द्वानी क्षेत्र से केदार पलड़िया, बालम सिंह और जगमोहन चिलवाल तथा नैनीताल से सुरेश डालाकोटी को शामिल किया गया है, जबकि रामनगर, भीमताल, गरमपानी, मुक्तेश्वर, रामगढ़ सहित अन्य क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में आंदोलनकारी रहे हैं।
घड़ियाल ने कहा कि जो लोग किसी सीमित क्षेत्र में आंदोलन के दौरान सक्रिय रहे, उनके लिए दूसरे क्षेत्रों में सक्रिय रहे आंदोलनकारियों की पहचान करना कठिन हो सकता है। ऐसे में सुदूरवर्ती क्षेत्रों के राज्य निर्माण आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण में देरी और विसंगतियां पैदा होने की आशंका है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि जिला स्तरीय चिन्हीकरण समितियों में राज्य आंदोलनकारी संगठनों के प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए। इसके साथ ही सभी राजनीतिक दलों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों को भी समिति में स्थान दिया जाए, ताकि विभिन्न क्षेत्रों में आंदोलन के दौरान सक्रिय रहे लोगों की पहचान में स्थानीय स्तर की जानकारी का उपयोग हो सके।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जिस तहसील अथवा क्षेत्र में राज्य आंदोलन के दौरान लोगों ने प्रतिनिधित्व किया और आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई, वहां के प्रतिनिधियों को चिन्हीकरण समिति में शामिल करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के 26 वर्ष बाद भी आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण पूरा नहीं हो पाना गंभीर विषय है। सरकार द्वारा समय-सीमा बढ़ाए जाने के साथ-साथ चिन्हीकरण प्रक्रिया में व्याप्त समस्याओं को भी दूर किया जाना जरूरी है।
उन्होंने शासन-प्रशासन से चिन्हीकरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और सभी क्षेत्रों के आंदोलनकारियों को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की।
बैठक में प्रदीप सिंह अनेरिया, मोहन चंद शर्मा, देवेंद्र सिंह बिष्ट, हीरा सिंह बिष्ट, आनंद सिंह, बलवंत सिंह डंगवाल, जानकी नेगी, कमला, जानकी कांडपाल, पुष्पा जोशी सहित कई राज्य आंदोलनकारी मौजूद रहे।।

