“अधिवक्ताओं के हक में शिवांगी गंगवार की हुंकार, सरकार से मांगी 7 बड़ी सुविधाएं”
“अधिवक्ताओं के हक में शिवांगी गंगवार की हुंकार, सरकार से मांगी 7 बड़ी सुविधाएं”
अधिवक्ता संरक्षण कानून लागू करने की मांग, जूनियर वकीलों के लिए स्टाइपेंड और ₹5 लाख कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा का प्रस्ताव
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
नैनीताल। उत्तराखंड में अधिवक्ताओं के लिए अधिवक्ता संरक्षण कानून लागू करने, जूनियर अधिवक्ताओं को मासिक स्टाइपेंड देने तथा कैशलेस चिकित्सा, बीमा और व्यापक कल्याण योजनाएं शुरू करने की मांग उठी है। कुर्मी महासभा उत्तराखंड की प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता शिवांगी गंगवार ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को प्रतिवेदन भेजकर अधिवक्ताओं के लिए समग्र सामाजिक एवं व्यावसायिक सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की है।
प्रतिवेदन में कहा गया है कि अधिवक्ता न्याय व्यवस्था के अभिन्न अंग हैं और आम नागरिकों के विधिक एवं मौलिक अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद अधिवक्ताओं के लिए सुरक्षा तथा सामाजिक-आर्थिक कल्याण का प्रभावी राज्यव्यापी ढांचा विकसित किए जाने की आवश्यकता है।
शिवांगी गंगवार ने प्रतिवेदन में अन्य राज्यों में अधिवक्ताओं के लिए लागू अथवा प्रस्तावित सुरक्षा एवं कल्याणकारी व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए कहा कि उत्तराखंड में भी अधिवक्ताओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक भविष्य को लेकर ठोस नीति बनाई जानी चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री से अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू करने, जूनियर एवं नवोदित अधिवक्ताओं के लिए मासिक स्टाइपेंड शुरू करने, पात्र अधिवक्ताओं एवं उनके आश्रित परिवारों के लिए कम से कम ₹5 लाख की कैशलेस चिकित्सा सुविधा अथवा स्वास्थ्य बीमा योजना लागू करने की मांग की है।
इसके साथ ही दुर्घटना एवं जीवन बीमा, आकस्मिक मृत्यु या गंभीर दुर्घटना की स्थिति में आर्थिक सहायता, वृद्ध एवं आर्थिक रूप से कमजोर अधिवक्ताओं के लिए मासिक पेंशन अथवा सहायता, अधिवक्ता कल्याण कोष को सरकारी अंशदान से मजबूत करने तथा महिला और युवा अधिवक्ताओं के लिए विशेष कल्याणकारी योजनाएं शुरू करने का आग्रह किया गया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता शिवांगी गंगवार ने कहा कि अधिवक्ता सरकार से किसी विशेष कृपा की अपेक्षा नहीं कर रहे हैं, बल्कि ऐसी संस्थागत और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था चाहते हैं, जिससे वे बिना भय और आर्थिक असुरक्षा के अपने विधिक दायित्वों का निर्वहन कर सकें। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांगों पर समयबद्ध नीति बनाकर आवश्यक शासनादेश जारी करने का आग्रह किया है।।

