क्रिटिकल केयर या इलाज के नाम पर वसूली? मरीज को डराओ… ICU में डालो… जांच-दवाइयों के नाम पर बिल बढ़ाओ! 9 घंटे अस्पताल में रहा मरीज, दो घंटे ICU में रखा; पार्क अस्पताल पहुंचा तो एक घंटे में मिली राहत
क्रिटिकल केयर या इलाज के नाम पर वसूली?
मरीज को डराओ… ICU में डालो… जांच-दवाइयों के नाम पर बिल बढ़ाओ!
9 घंटे अस्पताल में रहा मरीज, दो घंटे ICU में रखा; पार्क अस्पताल पहुंचा तो एक घंटे में मिली राहत
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
रुद्रपुर। सिविल लाइन स्थित कृष्णा क्रिटिकल केयर सेंटर की चमकदार फ्लेक्सों पर लिखी ‘क्रिटिकल केयर’ की तस्वीर के पीछे मरीजों के साथ कथित तौर पर एक अलग ही खेल चलने के आरोप सामने आए हैं। परिजनों का आरोप है कि मामूली हालत में पहुंचे मरीज और उनके तीमारदारों को बीमारी की गंभीरता और आईसीयू-वेंटिलेटर का भय दिखाकर मानसिक दबाव में लिया जाता है और फिर जांच, दवाइयों तथा आईसीयू के नाम पर खर्च बढ़ता चला जाता है।
दो दिन पहले का एक मामला इन आरोपों को और गंभीर बना रहा है। परिजनों के अनुसार मरीज सुबह करीब 9 बजे कृष्णा क्रिटिकल केयर सेंटर पहुंचा। जांच पर जांच होती रही, लेकिन मरीज को अपेक्षित राहत नहीं मिली। दोपहर करीब 2 बजे आईसीयू में भर्ती करने की बात कही गई। आईसीयू में रखने के बाद भी परिजनों को बताया गया कि मरीज को चार-पांच दिन तक आईसीयू में रखना पड़ सकता है और फायदा न होने पर वेंटिलेटर तक की नौबत आ सकती है।
डरे-सहमे परिजनों ने आखिरकार शाम करीब 4 बजे मरीज को वहां से निकाल लिया। इसके बाद उसे रुद्रपुर के पार्क अस्पताल ले जाया गया। परिजनों के मुताबिक वहां करीब 4:30 बजे उपचार शुरू हुआ और 5:30 बजे तक मरीज की हालत संतोषजनक हो गई सुबह 9 से शाम 4 बजे तक ‘क्रिटिकल’, दूसरे अस्पताल में एक घंटे में राहत! एक ही मरीज, लेकिन दो अस्पतालों में उपचार का इतना बड़ा अंतर अब सवालों के घेरे में है। कृष्णा सेंटर में करीब सात घंटे रखने और लगभग दो घंटे आईसीयू में भर्ती करने के बाद भी राहत नहीं मिली, जबकि दूसरे अस्पताल में पहुंचने के करीब एक घंटे के भीतर मरीज की हालत संतोषजनक होने का दावा परिजनों ने किया है। क्या मरीज वास्तव में इतना गंभीर था कि आईसीयू और संभावित वेंटिलेटर की जरूरत थी? या फिर बीमारी की गंभीरता बताकर परिजनों को डराया गया? इन सवालों का जवाब अब स्वास्थ्य विभाग की जांच से ही सामने आ सकता है। एक्स-रे मशीन तक खराब होने का आरोप अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी गंभीर सवाल हैं। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की एक्स-रे मशीन खराब है और इमरजेंसी अथवा आईसीयू में भर्ती मरीजों को एक्स-रे कराने के लिए बाहर ले जाना पड़ता है।
‘आयुष्मान नहीं लगाएंगे’—यह आरोप भी सामने आया
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में आयुष्मान की सुविधा होने के बावजूद डॉक्टर गौरव अग्रवाल की ओर से कहा गया कि नए मरीज को आयुष्मान पर भर्ती नहीं किया जाएगा, क्योंकि पहले से कई मरीज आयुष्मान पर भर्ती हैं और भुगतान नहीं मिल रहा परिजनों के अनुसार उन्हें यह भी कहा गया कि किसी अधिकारी या वीआईपी का फोन न करवाया जाए।
दो घंटे ICU, पूरे दिन का करीब ₹15 हजार चार्ज?
परिजनों का आरोप है कि मरीज को करीब दो घंटे आईसीयू में रखने के बावजूद एक दिन का करीब 15 हजार रुपये आईसीयू शुल्क लिया गया अब सवाल सिर्फ बिल का नहीं है—सवाल यह है कि मरीज को मिली चिकित्सा सेवा, आईसीयू में बिताया समय और वसूले गए शुल्क में कितना सामंजस्य था?
सीएमओ के सामने अब कई सवाल
कृष्णा क्रिटिकल केयर सेंटर पर लगे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है लेकिन आरोप इतने गंभीर हैं कि स्वास्थ्य विभाग को अस्पताल के आईसीयू रिकॉर्ड, मरीज की केस हिस्ट्री, जांच रिपोर्ट, बिलिंग, आयुष्मान रिकॉर्ड, एक्स-रे सुविधा और डॉक्टरों के उपचार रिकॉर्ड की जांच करनी चाहिए क्योंकि अगर आरोप सही हैं तो यह सिर्फ एक मरीज की कहानी नहीं—यह उन तमाम मरीजों का सवाल है जो बीमारी से लड़ने अस्पताल पहुंचते हैं और कहीं डर, मजबूरी और भारी बिल के बीच फंस न जाएं।।
