Wednesday, September 9, 2026
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ऊधम सिंह नगर

आयुष्मान नहीं लगाएंगे’, ‘किसी अधिकारी का फोन मत कराना’ कृष्णा क्रिटिकल केयर सेंटर पर डॉक्टर के खिलाफ गंभीर आरोप, स्वास्थ्य विभाग की जांच जरूरी‘

आयुष्मान नहीं लगाएंगे’, ‘किसी अधिकारी का फोन मत कराना’

कृष्णा क्रिटिकल केयर सेंटर पर डॉक्टर के खिलाफ गंभीर आरोप, स्वास्थ्य विभाग की जांच जरूरी‘सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान 

रुद्रपुर। कृष्णा क्रिटिकल केयर सेंटर को लेकर सामने आए आरोपों में सबसे गंभीर सवाल आयुष्मान योजना को लेकर उठ रहे हैं। आरोप है कि अस्पताल में आयुष्मान योजना की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद उनसे कहा गया कि आयुष्मान पर मरीज को भर्ती नहीं किया जाएगा आरोप है कि डॉक्टर गौरव अग्रवाल की ओर से परिजनों को यह कहा गया कि अस्पताल में पहले से कई मरीज आयुष्मान के तहत भर्ती हैं और सरकार की ओर से भुगतान नहीं मिलने के कारण नए मरीज को आयुष्मान पर नहीं लिया जाएगा यह आरोप सरकारी स्वास्थ्य योजना के संचालन से जुड़ा गंभीर मामला है और इसकी जांच संबंधित विभाग द्वारा की जानी चाहिए।‘अधिकारी या वीआईपी का फोन मत कराना’

परिजनों का एक और गंभीर आरोप है कि डॉक्टर की ओर से उन्हें यह भी कहा गया कि किसी अधिकारी अथवा वीआईपी का फोन न करवाया जाए गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज के परिजन पहले ही मानसिक दबाव में होते हैं। ऐसे में यदि उन्हें अस्पताल प्रशासन की ओर से इस प्रकार की बातें कही जाती हैं तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है।

दो घंटे आईसीयू, पूरे दिन का चार्ज?

आरोप है कि मरीज को करीब दो घंटे आईसीयू में रखा गया, लेकिन आईसीयू का करीब एक दिन का चार्ज, लगभग 14 हजार रुपये, लिया गया सवाल यह है कि आईसीयू में मरीज कितने घंटे रहा, किस आधार पर शुल्क निर्धारित किया गया, कौन-कौन सी सेवाएं दी गईं और बिल में किन मदों का शुल्क जोड़ा गया

—इन सभी बिंदुओं की जांच जरूरी है।

मामला सिर्फ एक अस्पताल का नहीं, मरीज के अधिकारों का है

किसी भी मरीज को उपचार से पहले उसकी बीमारी, संभावित जोखिम, उपचार के विकल्प और अनुमानित खर्च की स्पष्ट जानकारी मिलना जरूरी है। गंभीर स्थिति बताकर परिजनों को भयभीत करना और उसी भय के बीच महंगे उपचार के लिए मजबूर करना,यह बेहद गंभीर मामल है।

सीएमओ से जांच की मांग

मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी को संज्ञान लेकर अस्पताल की आईसीयू व्यवस्था, बिलिंग, आयुष्मान योजना के संचालन, एक्स-रे सुविधा, मरीजों के उपचार रिकॉर्ड और अस्पताल की अन्य व्यवस्थाओं की जांच करनी चाहिए साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि अस्पताल में मरीजों और तीमारदारों से संबंधित नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। मरीज इलाज के लिए अस्पताल जाता है, डर और अनिश्चितता के बीच आर्थिक बोझ उठाने के लिए नहीं अब देखना यह है कि स्वास्थ्य विभाग इन गंभीर आरोपों को कितनी गंभीरता से लेता है।।

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