Sunday, August 30, 2026
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ऊधम सिंह नगर

“आदेश हुआ, कार्रवाई हुई.. फिर कब्जे कैसे लौट आए?” पांच साल पुराना डीएम का आदेश भी बेअसर! 51 कब्जों ने रोक रखा बस टर्मिनल का रास्ता 2021 में डीएम रंजना राजगुरु ने दिए थे अतिक्रमण हटाने के निर्देश, पांच साल बाद भी पूरी जमीन खाली नहीं: कार्रवाई के बाद फिर सज गईं दुकानें

“आदेश हुआ, कार्रवाई हुई… फिर कब्जे कैसे लौट आए?”

पांच साल पुराना डीएम का आदेश भी बेअसर!

51 कब्जों ने रोक रखा बस टर्मिनल का रास्ता

2021 में डीएम रंजना राजगुरु ने दिए थे अतिक्रमण हटाने के निर्देश, पांच साल बाद भी पूरी जमीन खाली नहीं; कार्रवाई के बाद फिर सज गईं दुकानेंसौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान 

2021 का आदेश बनाम 2026 की हकीकत

2021 — तत्कालीन डीएम रंजना राजगुरु ने अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए।

2026 — प्रस्तावित जमीन पर करीब 51 दुकानें अब भी मौजूद।

10 साल — बस टर्मिनल परियोजना निर्माण की राह देख रही।

कार्रवाई — बिजली कटी, मुनादी हुई, जेसीबी चली।

नतीजा — कई जगह फिर खुल गईं दुकानें।

रुद्रपुर। शहर को आधुनिक रोडवेज बस टर्मिनल देने का सपना करीब दस साल से जमीन तलाश रहा है, लेकिन प्रस्तावित जमीन पर अतिक्रमण का कब्जा अब भी कायम है। हैरानी यह कि वर्ष 2021 में तत्कालीन डीएम रंजना राजगुरु ने पुराने बस अड्डे के स्थान पर आईएसबीटी निर्माण को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक कर बस अड्डे के पास से जल्द अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे। पांच साल गुजरने के बाद भी प्रस्तावित जमीन पूरी तरह खाली नहीं हो सकी। करीब 51 दुकानें अब भी परियोजना की राह में रोड़ा बनी हुई हैं। प्रशासन ने हाल के वर्षों में अतिक्रमण हटाने के लिए बिजली कनेक्शन काटे, मुनादी कराई और जेसीबी से कार्रवाई भी की। कुछ दुकानें खाली हुईं, लेकिन कार्रवाई की पकड़ ढीली पड़ते ही कई जगह फिर दुकानें खुल गईं। ऐसे में अब सवाल केवल अतिक्रमण का नहीं, बल्कि प्रशासनिक कार्रवाई की स्थायित्व और कथित राजनीतिक दबाव का भी है।

2021 में साफ थे डीएम के निर्देश

पुरानी समाचार कटिंग में दर्ज तत्कालीन डीएम रंजना राजगुरु के निर्देश के मुताबिक, आईएसबीटी निर्माण को लेकर संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी। इसमें बस अड्डे के पास से जल्द अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए थे। साथ ही परिवहन निगम के आरामगृह को लेकर आवश्यक कार्रवाई पूरी करने और संबंधित विभागों से सहयोग लेने के निर्देश भी दिए गए थे यानी अतिक्रमण हटाने का मुद्दा नया नहीं है। पांच साल पहले प्रशासनिक स्तर पर इसका रास्ता साफ करने के निर्देश दिए जा चुके थे। इसके बावजूद आज भी जमीन पूरी तरह खाली कराने की कवायद जारी है।जेसीबी गई, दुकानें फिर लौट आईं

प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद दोबारा दुकानें खुलना सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता है। यदि अतिक्रमण हटाने के बाद उसी स्थान पर फिर कारोबार शुरू हो जाता है तो सवाल उठता है कि कार्रवाई की निगरानी कौन कर रहा है और दोबारा कब्जा करने वालों पर क्या कार्रवाई हुई? प्रस्तावित टर्मिनल की जमीन पर करीब 51 दुकानों के कारण निर्माण एजेंसी के लिए काम शुरू करना मुश्किल है। जब तक पूरी जमीन खाली नहीं होती, परियोजना आगे बढ़ने की उम्मीद भी कमजोर बनी हुई है।

अब पीडब्ल्यूडी ने फिर मांगा पुलिस-प्रशासन का साथ

अतिक्रमण हटाने के लिए लोक निर्माण विभाग ने प्रशासन को पत्र भेजकर सहयोग मांगा है। विभाग का कहना है कि आवश्यक प्रशासनिक सहयोग और पुलिस बल मिलने के बाद कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता गजेन्द्र सिंह ने बताया कि अधिकारियों के निर्देश पर प्रशासन से सहयोग मांगा गया है। प्रशासन और पुलिस बल उपलब्ध होते ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।।

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