ऊधम सिंह नगर

आठ दिन में दूसरी घटना से उठे सवाल, क्या मिलक क्षेत्र में पुलिस का खौफ खत्म हो गया?

सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान 

मिलक। मिलक क्षेत्र में लगातार सामने आ रही संदिग्ध घटनाओं और पुलिस की कार्रवाई को लेकर अब कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। महज आठ दिनों के भीतर क्षेत्र में दूसरी बार युवक का शव फंदे से लटका मिलने की घटना सामने आने के बाद लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है कि आखिर अपराधियों में पुलिस का कितना खौफ रह गया है?

भैंसौड़ी गांव के जंगल में गौरव का शव संदिग्ध परिस्थितियों में पेड़ से लटका मिलने के बाद परिजनों ने पुरानी रंजिश के चलते हत्या कर शव को फंदे से लटकाने का आरोप लगाया घटना के बाद जिस तरह पुलिस की कार्रवाई को लेकर परिजनों ने हंगामा किया, उसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

परिजनों का आरोप था कि पुलिस ने शव का पंचनामा तक भरे बिना उसे पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बाद में विरोध बढ़ने पर पुलिस को शव वापस गांव लाना पड़ा और परिजनों को शव दिखाने के बाद दोबारा पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया सवाल यह है कि यदि पुलिस ने नियमानुसार कार्रवाई की थी तो फिर शव को वापस गांव लाने की नौबत क्यों आई?

आठ दिन में दूसरी घटना

मिलक क्षेत्र में यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि पिछले आठ दिनों के भीतर यह दूसरी ऐसी घटना है, जिसमें युवक का शव फंदे से लटका मिला और बाद में परिजनों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए विरोध किया इससे पहले मिलक क्षेत्र में सूरज पटेल की मौत के मामले में भी शव को लेकर परिजनों और समर्थकों ने हंगामा किया था उस मामले में पुलिस कार्रवाई और विरोध के बाद मिलक कोतवाल को भी हटाया गया था।

लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच अब क्षेत्र की जनता पुलिस की सक्रियता और अपराध नियंत्रण को लेकर सवाल उठा रही है। लोगों का कहना है कि अगर अपराधियों के खिलाफ समय रहते प्रभावी कार्रवाई हो और पुलिस का खौफ कायम रहे तो इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सकता है।

पुलिस की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में

भैंसौड़ी की घटना में परिजनों का आक्रोश केवल युवक की मौत को लेकर नहीं था, बल्कि पुलिस द्वारा शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया को लेकर भी था। परिजनों को शव वापस गांव लाने के लिए पुलिस के सामने अपनी मांग पर अड़ना पड़ा। ऐसे में पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।

हालांकि, गौरव की मौत हत्या है या आत्महत्या, यह अभी जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन घटना के बाद पैदा हुए हालात ने पुलिस के सामने एक बड़ी चुनौती जरूर खड़ी कर दी है।

क्या अपराधियों में खत्म हो रहा है पुलिस का डर?

मिलक क्षेत्र में लगातार हो रही घटनाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अपराधियों में पुलिस का खौफ खत्म हो गया है? यदि ऐसा नहीं है तो फिर बार-बार संदिग्ध परिस्थितियों में मौत और घटनाओं के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?

पुलिस अधिकारियों के सामने अब चुनौती सिर्फ घटनाओं का खुलासा करना ही नहीं, बल्कि जनता के बीच पुलिस के प्रति भरोसा कायम करना भी है। गौरव की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई ही यह तय करेगी कि मामला आत्महत्या का है या इसके पीछे कोई आपराधिक साजिश है।

फिलहाल भैंसौड़ी की घटना के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोगों की निगाह पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी है।।

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