786.73 करोड़ की मास्टर ड्रेनेज परियोजना में नगर निगम की भूमिका रही निर्णायक: महापौर विकास शर्मा
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
रुद्रपुर। 786.73 करोड़ रुपये की मास्टर ड्रेनेज परियोजना को लेकर उठ रहे सवालों के बीच महापौर विकास शर्मा ने बुधवार को प्रेस वार्ता कर परियोजना की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक की। उन्होंने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति या संस्था का नहीं, बल्कि पूरे शहर के हित से जुड़ा ऐतिहासिक प्रोजेक्ट है और इसे मंजूरी दिलाने में नगर निगम ने हर स्तर पर सक्रिय एवं निर्णायक भूमिका निभाई है।
महापौर ने बताया कि 7 फरवरी 2025 को शपथ ग्रहण करने के मात्र 15 दिन बाद, 22 फरवरी को नगर निगम सभागार में परियोजना को लेकर पहली विस्तृत बैठक आयोजित की गई। इसके बाद सिंचाई विभाग और नगर निगम के अधिकारियों के साथ वार्डों का निरीक्षण, जलभराव वाले क्षेत्रों का सर्वे तथा पार्षदों से सुझाव लेकर परियोजना को शहर की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार किया गया।
उन्होंने कहा कि प्रारंभिक योजना में जहां केवल 30 नालों को शामिल किया गया था, वहीं नगर निगम और सिंचाई विभाग के संयुक्त सर्वे के बाद 41 अतिरिक्त नालों को जोड़ते हुए करीब 67 किलोमीटर लंबा ड्रेनेज नेटवर्क प्रस्तावित किया गया। संशोधित डीपीआर शासन को भेजी गई और नगर निगम ने अपनी अनापत्ति इस शर्त पर दी कि कार्य की शुरुआत वार्ड संख्या-1 फुलसुंगी से की जाए, जिसे स्वीकार करते हुए पहले चरण में इसी क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई।
महापौर ने बताया कि परियोजना को गति देने के लिए उन्होंने कई बार मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर शहर की जलभराव समस्या से अवगत कराया। लगातार पैरवी और विभागीय समन्वय के बाद मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली व्यय वित्त समिति ने 786.73 करोड़ रुपये की डीपीआर को मंजूरी दी। प्रथम चरण में 441.79 करोड़ रुपये की लागत से कार्य शुरू किया जाएगा उन्होंने कहा कि 16 अप्रैल 2026 को कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक तथा जिलाधिकारी स्तर पर गठित समितियों में नगर आयुक्त को सदस्य बनाया गया, जो इस परियोजना में नगर निगम की महत्वपूर्ण भूमिका का प्रमाण है।
महापौर विकास शर्मा ने कहा कि कुछ लोग नगर निगम की भूमिका को लेकर भ्रम फैला रहे हैं, जबकि सभी कार्य सरकारी अभिलेखों में दर्ज हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य श्रेय लेना नहीं, बल्कि शहर को जलभराव की समस्या से स्थायी राहत दिलाना है। उन्होंने इस ऐतिहासिक स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, सांसद अजय भट्ट, विधायक शिव अरोरा, सिंचाई विभाग, नगर निगम के अधिकारियों एवं सभी जनप्रतिनिधियों का आभार भी व्यक्त किया।।

