मांगें पूरी नहीं हुईं तो तेज होगा आंदोलन, आशा व आशा फैसिलिटेटरों ने सरकार को भेजा ज्ञापन
मांगें पूरी नहीं हुईं तो तेज होगा आंदोलन, आशा व आशा फैसिलिटेटरों ने सरकार को भेजा ज्ञापन
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
रुद्रपुर। उत्तराखंड में आशा एवं आशा फैसिलिटेटर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक बार फिर मुखर हो गई हैं। बुधवार को उधम सिंह नगर में आशा फैसिलिटेटर संगठन एवं उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन प्रधानमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, मुख्यमंत्री तथा जिला प्रशासन के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को प्रेषित किया गया।
ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 2005 से स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत कार्यरत आशा एवं आशा फैसिलिटेटर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, स्वास्थ्य योजनाओं का प्रचार-प्रसार, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता और विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इसके बावजूद उन्हें आज तक न तो स्थायी कर्मचारी का दर्जा मिला है और न ही सम्मानजनक मानदेय एवं सामाजिक सुरक्षा की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
संगठन ने मांग की है कि आशा फैसिलिटेटरों को 25 दिनों की मोबिलिटी के स्थान पर 30 दिनों का निश्चित मानदेय दिया जाए, उन्हें स्थायी कर्मचारी घोषित कर पदानुसार वेतनमान लागू किया जाए। साथ ही सामाजिक सुरक्षा, स्टेशनरी एवं यात्रा भत्ता, पीएलए एवं बीएचएसएनसी बैठकों का मानदेय बढ़ाने तथा राज्य कर्मचारियों की भांति अवकाश समेत अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। पहाड़ी क्षेत्रों में कार्य करने के कारण यात्रा भत्ता एवं दैनिक भत्ते में वृद्धि की मांग भी उठाई गई।
वहीं उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन ने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में वर्ष 2021 में घोषित 11,500 रुपये मासिक मानदेय लागू करने, न्यूनतम वेतन, कर्मचारी का दर्जा, सेवानिवृत्ति पर पेंशन एवं एकमुश्त आर्थिक सहायता, विभिन्न मदों का लंबित भुगतान समय पर करने, प्रशिक्षण भत्ता बढ़ाने तथा सरकारी अस्पतालों में आशाओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग की।
संगठन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी वर्षों पुरानी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो प्रदेशभर में आंदोलन तेज किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और स्वास्थ्य विभाग की होगी।

