एलर्जिक राइनाइटिस के इलाज में आयुर्वेदिक औषधि ‘इम्बो’ कारगर बताई गई
एलर्जिक राइनाइटिस के इलाज में आयुर्वेदिक औषधि ‘इम्बो’ कारगर बताई गई
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
गदरपुर। एलर्जिक राइनाइटिस (सर्दी-जुकाम) के उपचार को लेकर आयोजित एक राज्य स्तरीय संगोष्ठी में आयुर्वेदिक औषधि “इम्बो” को प्रभावी और शोध आधारित दवा बताया गया। ग्राम रतनपुरा स्थित पड़ाव मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल में आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से आए आयुर्वेद विशेषज्ञों, चिकित्सकों और वैज्ञानिकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पद्मश्री सम्मानित आयुर्वेदाचार्य वैद्य बालेंदु प्रकाश ने कहा कि “इम्बो” का निर्माण 18 औषधीय घटकों से किया गया है, जिनमें चार प्रमुख जड़ी-बूटियां और मंडूर भस्म शामिल हैं। उन्होंने बताया कि दवा को बाजार में लाने से पहले क्लिनिकल ट्रायल और पशुओं पर परीक्षण किए गए, जिनमें इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए।
उन्होंने दावा किया कि एलर्जिक राइनाइटिस के उपचार में यह औषधि कई मामलों में एलोपैथिक उपचार से अधिक प्रभावकारी पाई गई है और इसके दुष्प्रभाव भी बेहद कम हैं। कुछ रोगियों में इसका असर शुरुआती मिनटों में महसूस किया गया।
वैद्य बालेंदु प्रकाश ने बताया कि “इम्बो” को उत्तराखंड सरकार से निर्माण लाइसेंस प्राप्त है और वर्तमान में देशभर के लगभग 1500 आयुर्वेदिक चिकित्सक इसका उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह औषधि शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में भी सहायक मानी जा रही है।
उन्होंने जानकारी दी कि “इम्बो” का आधार चरक संहिता में वर्णित “पुनर्नवा मंडूर” योग है, जिसे आधुनिक शोध और मानकीकरण के जरिए नए स्वरूप में विकसित किया गया है। “इम्बो” का अर्थ इम्यूनिटी बूस्टर बताया गया।
संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने बताया कि विभिन्न परीक्षणों में यह औषधि शरीर के कई इम्यून मार्कर्स पर सकारात्मक प्रभाव डालती पाई गई। केरल और कानपुर मेडिकल कॉलेज में किए गए नियंत्रित क्लिनिकल ट्रायल्स में भी इसके उत्साहजनक परिणाम सामने आए।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के 18 आयुर्वेदिक चिकित्सकों को “इम्बो ब्रांड एम्बेसडर” के रूप में सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बिलासपुर नगर पालिका परिषद अध्यक्ष चित्रक मित्तल रहे, जबकि अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप फुटेला ने की।
कार्यक्रम में न्यूरोसर्जन डॉ. सुनील गौतम, हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. चंद्रक बंसल तथा उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. राजीव कुरेले सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे। विशेषज्ञों ने आयुर्वेद में शोध और पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि इस तरह की संगोष्ठियां आयुर्वेदिक चिकित्सा को नई दिशा देने में सहायक हैं।।

