मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सराही गौरव पांडेय की पारंपरिक बर्यात कुमाऊँनी संस्कृति, मातृभाषा और नशा मुक्त विवाह का दिया प्रेरणादायी संदेश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सराही गौरव पांडेय की पारंपरिक बर्यात
कुमाऊँनी संस्कृति, मातृभाषा और नशा मुक्त विवाह का दिया प्रेरणादायी संदेश
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
चम्पावत। बदलते दौर में जहां विवाह समारोह आधुनिकता और दिखावे की चकाचौंध में अपनी पारंपरिक पहचान खोते जा रहे हैं, वहीं वरिष्ठ पत्रकार दिनेश पांडेय के ज्येष्ठ पुत्र गौरव पांडेय का विवाह समारोह कुमाऊँनी संस्कृति और वैदिक परंपराओं का अद्भुत उदाहरण बनकर सामने आया। पूरे आयोजन में लोक संस्कृति, मातृभाषा और सामाजिक मूल्यों को विशेष महत्व दिया गया, जिसकी लोगों ने खूब सराहना की।
विवाह का शुभारंभ कुमाऊँनी भाषा में छपे पारंपरिक निमंत्रण पत्रों से हुआ। इन निमंत्रण पत्रों को सबसे पहले ईष्ट देवी-देवताओं को समर्पित कर शुभ कार्य की शुरुआत की गई। विवाह की सभी रस्में शगुन आखर और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पारंपरिक विधि-विधान के अनुसार संपन्न हुईं हल्दी समारोह में महिलाओं ने रंग्याली पिछौड़ी धारण कर पारंपरिक लोकगीतों के साथ मंगल गीत गाए। वहीं मेहंदी कार्यक्रम में आधुनिक डीजे और कॉकटेल संस्कृति से दूरी बनाते हुए भजन-कीर्तन और धार्मिक वातावरण को प्राथमिकता दी गई। पूरी रात भक्तिमय माहौल में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे उत्साहपूर्वक शामिल रहे।
बर्यात के स्वागत और प्रस्थान के दौरान ढोल-दमाऊँ की पारंपरिक थाप और छलिया नृत्य ने समारोह को विशेष आकर्षण प्रदान किया। पानी परखने, भाभी द्वारा काजल लगाने और मां के दूध का फर्ज निभाने जैसी पारंपरिक रस्मों को भी पूरे रीति-रिवाजों के साथ संपन्न किया गया पाणिग्रहण संस्कार में धूलिघर, गोत्राचार, गोठको ब्या, फेरे, शय्यादान और लक्ष्मी-नारायण पूजा सहित सभी वैदिक अनुष्ठान विधिवत कराए गए। विवाह भोज में भी स्थानीय व्यंजनों को विशेष स्थान दिया गया, जहां पारंपरिक रसोई में भट्ट की दाल, भात, खीर सहित कई पहाड़ी पकवान तैयार किए गए।
महिला संगीत, पिठ्यां लगाने, पारंपरिक उपहार आदान-प्रदान और श्री सत्यनारायण कथा के साथ विवाह समारोह उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। पांचवें दिन दुनगौन की रस्म, ईष्टदेव पंचबलिया में पूजा-अर्चना और देवी पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कुमाऊँनी भाषा में छपे आमंत्रण पत्र और संस्कृति संरक्षण के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी पहल बताया।।

