ऊधम सिंह नगर

सुखदेव हालदार के नेतृत्व में 6 दिवसीय धरने को मिला व्यापक समर्थन, “आरक्षण हमारा अधिकार—एक देश, एक कानून” की उठी मांग

सुखदेव हालदार के नेतृत्व में 6 दिवसीय धरने को मिला व्यापक समर्थन, “आरक्षण हमारा अधिकार—एक देश, एक कानून” की उठी मांग

सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान 

रुद्रपुर/दिनेशपुर। वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता एवं युवा नेता सुखदेव हालदार के नेतृत्व में पिछले छह दिनों से जारी धरने को बंगाली समाज का व्यापक समर्थन मिल रहा है। धरना स्थल पर शुक्रवार को वरिष्ठ अधिवक्ता संजय आईस, युवा नेता सुभाष राय, समाजसेवी डॉ. सुभरो चक्रवर्ती सहित अनेक गणमान्य लोगों ने पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया अखिल भारतीय बंगाली एकता मंच के संस्थापक सुब्रत कुमार विश्वास के आह्वान पर आयोजित इस समर्थन अभियान में स्थानीय युवाओं, छात्र नेताओं और समाज के वरिष्ठ लोगों की भी सक्रिय भागीदारी रही। आंदोलनकारियों ने “आरक्षण हमारा अधिकार—एक देश, एक कानून” का नारा बुलंद करते हुए देशभर में समान आरक्षण नीति लागू करने की मांग उठाई, ताकि अल्पसंख्यक एवं पिछड़े वर्गों के अधिकारों को समान रूप से सुनिश्चित किया जा सके।

धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि संविधान में निहित समानता और न्याय के सिद्धांतों की रक्षा के लिए चलाया जा रहा है। वरिष्ठ समाजसेवी शंकर सरकार और बलराम ढाली ने कहा कि यह संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक केंद्र और राज्य सरकारें इस मुद्दे पर गंभीर पहल नहीं करतीं युवा समाजसेवी दीपक विश्वास और छात्र नेता भजन ने युवाओं से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी अब सामाजिक न्याय और समान अवसरों के मुद्दे पर जागरूक होकर संघर्ष करने को तैयार है।

धरना स्थल पर मौजूद आंदोलनकारियों ने सरकार से वार्ता की मांग करते हुए कहा कि “एक देश—एक कानून” की अवधारणा पर केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर ठोस नीति तैयार करनी चाहिए, जिससे राज्यों के बीच आरक्षण और अधिकारों में मौजूद असमानताओं को समाप्त किया जा सके वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि शांतिपूर्ण वार्ता के माध्यम से समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा तथा सत्याग्रह और जनजागरण अभियान चलाए जाएंगे।

धरने को स्थानीय नागरिकों का भी समर्थन मिल रहा है। कई लोगों ने आर्थिक और नैतिक सहयोग प्रदान करते हुए आंदोलन को सामाजिक न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। आंदोलन के दौरान विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों ने भी अपनी भागीदारी दर्ज कराई और कहा कि यह मुद्दा केवल रोजगार और शिक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि स्वाभिमान, सांस्कृतिक पहचान और न्यायिक अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है आयोजकों ने बताया कि आंदोलन के अगले चरण में कानूनी विकल्पों पर विचार, राज्य स्तरीय समन्वय तथा राष्ट्रीय अल्पसंख्यक संगठनों से संवाद की रणनीति तैयार की जाएगी। इस अवसर पर सुब्रत कुमार विश्वास ने कहा, “हम किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं हैं। हमारा उद्देश्य केवल समाज के लोगों को उनका अधिकार दिलाना है।”

error: Content is protected !!
Call Now Button