ग्रीन जोन में काट दी अवैध कॉलोनी, बिना रास्ते बसाई जा रही आबादी गंगापुर आश्रम के पीछे धड़ल्ले से चल रहा खेल, विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
ग्रीन जोन में काट दी अवैध कॉलोनी, बिना रास्ते बसाई जा रही आबादी
गंगापुर आश्रम के पीछे धड़ल्ले से चल रहा खेल, विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
रुद्रपुर। गंगापुर आश्रम के पीछे अवैध कॉलोनी काटे जाने का मामला सामने आने के बाद एक बार फिर विकास प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं। शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही अवैध कॉलोनियों के बावजूद जिम्मेदार विभाग प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम नजर आ रहे हैं। ताजा मामला ऐसे क्षेत्र का है, जहां चारों तरफ ग्रीन जोन और उपजाऊ कृषि भूमि मौजूद है, लेकिन इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर प्लॉटिंग कर दी गई स्थानीय लोगों के अनुसार, कॉलोनी बिना किसी वैध स्वीकृति और नक्शा पास कराए विकसित की जा रही है। सबसे हैरानी की बात यह है कि जिस स्थान पर प्लॉट काटे गए हैं, वहां तक पहुंचने के लिए कोई वैध और चौड़ा रास्ता तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में भविष्य में यहां रहने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। यदि किसी प्रकार की आगजनी, दुर्घटना या स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति उत्पन्न होती है, तो एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी जरूरी सेवाओं का मौके तक पहुंच पाना लगभग असंभव हो सकता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अवैध कॉलोनाइजर पहले सस्ते दामों पर कृषि भूमि खरीदते हैं और फिर बिना अनुमति छोटे-छोटे प्लॉट काटकर लोगों को बेच देते हैं। कई बार भोले-भाले लोग अपनी जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर ऐसे प्लॉट खरीद लेते हैं, लेकिन बाद में उन्हें मूलभूत सुविधाओं के अभाव और कानूनी विवादों का सामना करना पड़ता है। सड़कों, नालियों, बिजली, पानी और सीवर जैसी सुविधाएं न होने के कारण ऐसी कॉलोनियां भविष्य में बड़ी समस्या बन जाती हैं। बताया जा रहा है कि इस अवैध प्लॉटिंग से जुड़े कॉलोनाइजर बरेली और पीलीभीत क्षेत्र के हैं, जो लंबे समय से रुद्रपुर और उधम सिंह नगर में सक्रिय बताए जाते हैं। सूत्रों की मानें तो ये लोग प्रशासनिक कार्रवाई से बचने के लिए अलग-अलग नामों और माध्यमों से जमीनों की खरीद-फरोख्त करते हैं। यही वजह है कि लगातार शिकायतों के बावजूद इन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती।
वहीं, क्षेत्रीय लोगों का आरोप है कि यदि विकास प्राधिकरण समय रहते कार्रवाई करता, तो ग्रीन जोन में इस प्रकार अवैध कॉलोनी विकसित नहीं हो पाती। लोगों का कहना है कि बिना विभागीय मिलीभगत के इतनी बड़ी प्लॉटिंग संभव नहीं है। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बिना नक्शा पास हुए और बिना सड़क के कॉलोनी कैसे विकसित हो गई? क्या संबंधित विभाग को इसकी जानकारी नहीं थी, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गईं? शहर में तेजी से फैल रही अवैध कॉलोनियां आने वाले समय में प्रशासन और स्थानीय निकायों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ऐसी अवैध प्लॉटिंग पर रोक नहीं लगी, तो भविष्य में यातायात, जलनिकासी, पर्यावरण और सुरक्षा जैसी समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि विकास प्राधिकरण इस मामले में केवल नोटिस जारी कर औपचारिकता निभाता है या फिर अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए ग्रीन जोन में हो रहे अवैध निर्माण पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाता है।।

