विकास भवन में नियमों की अनदेखी,काले शीशे वाले वाहनों में हो रहा खेल पारदर्शिता पर उठे बड़े सवाल
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
रूद्रपुर। जिला मुख्यालय स्थित विकास भवन फिर चर्चाओं में है। वजह है सरकारी कार्यालयों में तैनात कई अधिकारियों द्वारा परिवहन विभाग के नियमों की खुलेआम अनदेखी शहर में जहां पुलिस काले शीशे लगे वाहनों पर लगातार सख्ती दिखाती है, वहीं विकास भवन परिसर में रोज़ाना काले शीशे वाले कई वाहन पूरी बेफिक्री से खड़े मिल जाते हैं। यह न केवल नियमों की धज्जियां उड़ाता है, बल्कि पुलिस प्रशासन की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है।
परिवहन विभाग का नियम है कि किसी भी निजी या सरकारी वाहन में काले शीशे लगाना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद विकास भवन में कई अधिकारी नियमों को ताक पर रखकर काले शीशों वाले वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। दूसरी ओर, शहर में आम लोगों पर पुलिस ऐसे ही वाहनों के खिलाफ चालान की कार्रवाई तेज़ करती रहती है। यह दोहरी नीति लोगों के बीच असंतोष बढ़ा रही है।
सूत्रों का दावा है कि काले शीशे लगे वाहनों का इस्तेमाल कई अधिकारी संवेदनशील या संदिग्ध मुलाक़ातों के लिए कर रहे हैं। बताया गया है कि कई बार अधिकारी इन वाहनों में ठेकेदारों या बाहरी व्यक्तियों के साथ घंटों तक मुलाक़ातें करते देखे गए हैं। ऐसी गोपनीय बैठकों ने सवालों की संख्या बढ़ा दी है क्या काले शीशों के पीछे कोई छुपा एजेंडा है? क्या यह माहौल पारदर्शिता से अधिक परदेबाज़ी को बढ़ावा दे रहा है?
जब जिला मुख्यालय जैसे महत्वपूर्ण परिसर में ही नियमों का पालन न हो, तो आम जनता के बीच शासन-प्रशासन की छवि पर इसका सीधा असर पड़ता है। पुलिस की कार्रवाई यदि आम लोगों तक सीमित रह जाए और अधिकारी खुद को उससे ऊपर समझें, तो यह संदेश जाता है कि नियमों का पालन केवल जनता के लिए है, अधिकारियों के लिए नहीं।
स्थानीय लोगों और कर्मचारियों के बीच यह चर्चा का विषय बन गया है कि आखिर विकास भवन में काले शीशों वाले वाहनों की अनुमति किसने दी? यदि किसी ने नहीं दी, तो फिर इस पर रोक क्यों नहीं लगाई जा रही? यह भी जानना आवश्यक है कि अधिकारी नियमों का पालन क्यों नहीं कर रहे हैं और इन बंद वाहनों में हो रही बैठकों का उद्देश्य क्या है। विकास भवन का यह मामला सिर्फ काले शीशों का नहीं है, बल्कि सिस्टम में छिपे उन सवालों का भी है जो अब सतह पर आ रहे हैं।।

