ऊधम सिंह नगर

रसूख के आगे फिर ‘नतमस्तक’ हुई ‘खाकी’ सौरभ बेहड़ अटैक केसः मुख्य साजिशकर्ताओं पर पुलिस मेहरबान

रसूख के आगे फिर ‘नतमस्तक’ हुई ‘खाकी’

सौरभ बेहड़ अटैक केसः मुख्य साजिशकर्ताओं पर पुलिस मेहरबान

सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान 

रूद्रपुर। न्याय की देवी की आंखों पर पट्टी बंधी होती है, लेकिन ऊधमसिंह नगर पुलिस की आंखों पर शायद ‘सियासी रसूख’ का चश्मा चढ़ गया है। पूर्व मंत्री तिलकराज बेहड़ के पुत्र सौरभ बेहड़ पर हुए कथित हमले का सच जब ‘झूठ’ की बुनियाद पर खड़ा पाया गया, तो उम्मीद थी कि कानून का डंडा सबसे पहले साजिश रचने वालों पर चलेगा लेकिन हकीकत इसके उलट है। पुलिस ने इस पूरी कहानी में ‘जी-हजूर’ की भूमिका निभाते हुए मुख्य साजिशकर्ता को फिलहाल छोड़ दिया है और तीन मासूम छात्रों के भविष्य पर ‘अपराधी’ का ठप्पा लगाकर अपनी पीठ थपथपा रही है।

18 जनवरी की शाम को जिस घटना ने पूरे राज्य को हिला दिया था, वह महज एक ‘पब्लिसिटी स्टंट’ और पारिवारिक कलह का नतीजा निकली खुद पर हमला करवाने वाले पार्षद सौरभ बेहड़ पर कार्रवाई करने के बजाय पुलिस उसे गनर मुहैया करा रही है। वहीं, इस पूरी साजिश का सूत्रधार इंदर नारंग, जिसने पूरी साजिश रची गाड़ी और बाइक उपलब्ध कराई, उसे मामूली धाराओं में लपेटकर ‘सरकारी गवाह’ बना दिया गया है। सवाल यह है कि क्या कानून की किताबें अब सत्ता के गलियारों में लिखी जा रही हैं?

बता दें बीती 18 जनवरी की शाम को आवास विकास मुख्य मार्ग पर सौरभ बेहड़ पर हमले की खबर से रूद्रपुर से लेकर देहरादून तक हड़कंप मच गया था बताया गया था कि बाइक सवार तीन युवकों ने सौरभ की स्कूटी को लात मारकर गिरा दिया और उनके साथ मारपीट कर फरार हो गए घायल अवस्था में सौरभ को अस्पताल भर्ती कराया गया जहां कांग्रेस और भाजपा के दिग्गजों समेत समर्थकों का भारी जमावड़ा लग गया घटना के विरोध में तिलकराज बेहड़ के आवास पर महापंचायत बुलाई गई जिसमें आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर उग्र आंदोलन और बाजार बंद करने तक की चेतावनी दे दी गई थी। 

मामला हाईप्रोफाइल होने के कारण एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने कई टीमें गठित कर जल्द खुलासे के निर्देश दिए थे कई सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गयी जब पुलिस ने सर्विलांस और तकनीक की मदद से कड़ियों को जोड़ा, तो मामला कुछ और ही निकलां जांच में सामने आया कि सौरभ बेहड़ ने अपने करीबी दोस्त इंदर नारंग के साथ मिलकर खुद पर हमले का नाटक रचा था इंदर नारंग ने सौरभ बेहड़ के कहने पर ही तीन अन्य भोले भाले युवकों को इस काम के लिए तैयार किया, जिन्होंने नासमझी में इस फर्जी घटना को अंजाम दे दिया। 

दरअसल सौरभ अपने किसी पारिवारिक विवाद को सुलझाने और विरोधियों को सबक सिखाने के लिए सहानुभूति बटोरना चाहता था, जिसके लिए उसने यह फर्जी स्क्रिप्ट तैयार की सौरभ की रची हुई साजिश के तहत इंदर नारंग की शह पर हमले की पूरी घटना को इंजाम दिया गया पुलिस ने इस मामले में इंदर नारंग समेत तीन अन्य युवकों को गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन मुख्य साजिशकर्ता जिसके कारण यह इतना बड़ा बवंडर खड़ा हुआ है वो अभी भी पुलिस की कार्रवाई से बचा हुआ है, और घर पर आराम फरमा रहा है। उस पर कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने उसे सुरक्षा मुहैया कराते हुए गनर भी दे दिया है। 

हैरानी की बात यह है कि जिन पढ़ने लिखने वाले तीन युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, उनकी गिरफ्तारी के साथ ही पुलिस ने उनसे दो तमंचे कारतूस ओर चाकू बरामद होने की बात कही है। पढ़ने लिखने वाले इन बच्चों पर तमंचे चाकू होने की बात किसी के गले नहीं उतर रही हैं। तीनों युवकों को करीब से जानने वाले लोगों का भी यह साफ तौर पर कहना है कि न तो इन तीनों युवको का पहले कोई आपराधिक रिकार्ड है और नहीं उन्हें किसी गलत हरकत में पहले कभी देखा गया है। 

पुलिस का दोहरा चरित्र यहां भी सामने आ रहा है कि पुलिस ने मास्टर माइंड इंदर नारंग पर मामूली मारपीट की धारा लगाकर उसे सरकारी गवाह बना दिया है। जबकि पूरे प्रकरण में मुख्य भूमिका इंदर नारंग की ही है। घटना में प्रयुक्त इंदर की हीबाईक भी पुलिस ने बरामद किया है और इंदर ने ही इस घटना को अंजाम देने के लिए अपनी बैगनार कार का भी इस्तेमाल किया था पूरी साजिश को अंजाम देने के लिए इंदर पूरे घटनाक्रम में साथ था और उसने ही तीनों युवकों को घटना के बाद उनके इलाकों तक अपनी ही कार से छोड़ा था ऐसे में पुलिस मुख्य साजिशकर्ताओं पर क्यों मेहरबान है और क्यों मासूम छात्रों को अपराधी बनाया जा रहा है इसको लेकर पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं। हालाकि मामले में लेकर जब कोतवाल से बात की गयी तो उन्होंने दावा किया कि इस मामले में सौरभ बेहड़ को भी गिरफ्तार किया जायेगा। 

वाहवाही की भूख में ‘खाकी’ ने दांव पर लगाया तीन छात्रों का भविष्य

रुद्रपुर। पार्षद पर हमले की फर्जी ‘स्क्रिप्ट’ में जिन तीन युवकों को मोहरा बनाया गया, उनके भविष्य पर पुलिस ने अपनी ‘गुड वर्क’ की भूख मिटाने के लिए कालिख पोत दी है। महज 18 से 21 साल की उम्र- ये वो दहलीज होती है जहां युवा अपने सपनों को बुनते हैं। इनमें से एक बीबीए का छात्र है, दूसरा इंटर का और तीसरा भी अपनी पढ़ाई में मशगूल था बेशक, इन युवाओं ने बहकावे में आकर एक रसूखदार के खेल का हिस्सा बनकर गलती की, लेकिन क्या उनकी यह ‘नासमझी’ इतनी बड़ी थी कि उन्हें पेशेवर अपराधियों की श्रेणी में खड़ा कर दिया जाए? हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने इन पढ़ने-लिखने वाले लड़कों के पास से तमंचे और चाकू बरामद होने का दावा किया है। यह थ्योरी किसी के गले नहीं उतर रही जानकारों का कहना है कि पुलिस अगर थोड़ी भी संवेदनशील होती, तो वास्तविक घटना के आधार पर ‘मारपीट’ की धाराओं में कार्रवाई कर उन्हें सुधरने का मौका दे सकती थी। लेकिन उधम सिंह नगर पुलिस ने अपनी साख बचाने और वाहवाही लूटने के लिए एक ऐसी काल्पनिक कहानी गढ़ी, जिसने इन मासूमों को जुर्म की अंधेरी दुनिया के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। बीते कुछ समय से विवादों के साये में रही जिला पुलिस ने इस कार्रवाई से एक बार फिर अपनी कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस का काम अपराध रोकना है या बेगुनाह छात्रों पर संगीन धाराएं थोपकर उन्हें भविष्य का ‘हार्डकोर क्रिमिनल’ बनाना? अगर ये छात्र सलाखों के पीछे से टूटकर निकले, तो समाज और व्यवस्था के प्रति उनकी नफरत का जिम्मेदार कौन होगा?

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