छुटभैये नेताओं की दबंगई से सरकारी मुलाजिम परेशान – अफसरों पर रौब जमाकर ठेके और काम निकालने का चल रहा खेल – ट्रांसफर की धमकी भी देते हैं दबंग, टूट रहा अधिकारियों का मनोबल
छुटभैये नेताओं की दबंगई से सरकारी मुलाजिम परेशान
– अफसरों पर रौब जमाकर ठेके और काम निकालने का चल रहा खेल
– ट्रांसफर की धमकी भी देते हैं दबंग, टूट रहा अधिकारियों का मनोबल
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
रूद्रपुर। जिले में सत्ता की आड़ लेकर कुछ छुटभैये नेता और ठेकेदारों की दबंगई लगातार बढ़ती जा रही है। इनके रवैये से सरकारी विभागों के अधिकारी और कर्मचारी बेहद परेशान हैं। अफसरों का कहना है कि ऐसे लोग सत्ता पक्ष के नेताओं से नजदीकियां दिखाकर न केवल विभागीय कार्यों में अनैतिक हस्तक्षेप करते हैं, बल्कि दबाव व धमकी देकर टेंडर और अन्य फायदे भी हासिल करना चाहते हैं।
जानकारी के अनुसार, कई ठेकेदार और स्वयंभू नेता कभी सांसद तो कभी विधायक या मुख्यमंत्री के साथ खिंचवाई गई तस्वीरें दिखाकर खुद को वरिष्ठ नेताओं का करीबी साबित करते हैं। वीआईपी दौरे और कार्यक्रमों के दौरान ये लोग नेताओं की परिक्रमा करते दिखाई देते हैं और बाद में उन तस्वीरों व कथित पहुंच का हवाला देकर सरकारी दफ्तरों में दबंगई दिखाते हैं।
कई विभागीय अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ऐसे लोग फाइलों में तेजी लाने, मनचाहे ठेके दिलाने या अपनी मनमानी करने के लिए दबाव बनाते हैं। इतना ही नहीं, कई बार अधिकारी उनकी अवैध मांगों को पूरा करने से इनकार कर देते हैं तो उन्हें ट्रांसफर कराने की खुली धमकी तक दी जाती है। अधिकारियों के अनुसार कभी पार्टी के बड़े नेताओं से संबंध बताकर, तो कभी सत्ता की ताकत का हवाला देकर दबंगई दिखाई जाती है। इस कारण कार्य संस्कृति प्रभावित हो रही है और कर्मचारियों का मनोबल गिर रहा है।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं बार-बार भ्रष्टाचार और दबाव की राजनीति के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का दावा करते हैं। मगर जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। अफसरों का कहना है कि सत्ता पक्ष के ही कुछ छुटभैये नेता इस नीति की धज्जियां उड़ा रहे हैं। उनकी दबंगई और राजनीतिक संरक्षण का दिखावा जिला प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
स्थिति यह है कि अधिकारी व कर्मचारी खुलकर काम करने से कतराने लगे हैं। किसी भी विभागीय निर्णय में उन्हें यह डर सताता है कि कहीं स्थानीय ठेकेदार या छुटभैये नेता दबाव बनाकर दखल न दें इसका सीधा असर प्रशासन की कार्यप्रणाली और विकास कार्यों पर पड़ रहा है।।