ऊधम सिंह नगर

विदेश जाने का सपना या फर्जीवाड़े का जाल? – रुद्रपुर से तिहाड़ तक पहुंचा पासपोर्ट घोटाला – उजागर हुई इमीग्रेशन एजेंसियों की काली सच्चाई

विदेश जाने का सपना या फर्जीवाड़े का जाल?

– रुद्रपुर से तिहाड़ तक पहुंचा पासपोर्ट घोटाला 

– उजागर हुई इमीग्रेशन एजेंसियों की काली सच्चाई

सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान 

रुद्रपुर। विदेश जाने का सपना अब एक भयावह हकीकत में बदलता नजर आ रहा है। रुद्रपुर से शुरू हुई एक वीज़ा और पासपोर्ट फर्जीवाड़े की चौंकाने वाली कहानी अब देश की राजधानी दिल्ली की तिहाड़ जेल तक पहुँच चुकी है। पंजाब के फिरोज़पुर निवासी ताजिंदर सिंह के नाम पर जारी वैध कनाडाई वीज़ा का इस्तेमाल कर एक अन्य युवक गुरफिंदर सिंह को विदेश भेजने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।

यह केवल एक व्यक्ति के पहचान पत्र के दुरुपयोग का मामला नहीं है, बल्कि इमीग्रेशन एजेंसियों, दलालों और फर्जी दस्तावेज़ तैयार करने वाले एक पूरे संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश है, जो रुद्रपुर, पंजाब और दिल्ली तक फैला हुआ है। जानकारी के अनुसार, गुरफिंदर सिंह को ताजिंदर सिंह के पासपोर्ट और कनाडाई वीज़ा का इस्तेमाल कर विदेश भेजा गया इस फर्जीवाड़े के बदले 20 लाख रुपये की भारी रकम वसूली गई जब असली पासपोर्ट धारक ताजिंदर सिंह को इसका पता चला तो उसे चुप कराने के लिए 10 लाख रुपये का ‘सेटलमेंट ऑफर’ भी दिया गया।

इस पूरे नेटवर्क का संचालन कथित रूप से रुद्रपुर के काशीपुर बाईपास स्थित आशीर्वाद कॉम्प्लेक्स में स्थित ‘मूव ओवरसीज’ से किया जा रहा था इस एजेंसी के तरुण जुनेजा, और साथ ही एजेंट दलविंदर सिंह, कर्मनदीप औलख, और तालविंदर रंधावा इस घोटाले के मुख्य किरदार बताए जा रहे हैं। 24 अगस्त को दिल्ली पुलिस ने मूव ओवरसीज से जुड़े कर्मनदीप औलख और तालविंदर रंधावा को गिरफ्तार किया पुलिस के अनुसार, इन्होंने फर्जी पासपोर्ट और वीज़ा तैयार कर गुरफिंदर सिंह को दिल्ली एयरपोर्ट से इंग्लैंड भेजा था लेकिन इमीग्रेशन जांच में गड़बड़ी पकड़ी गई और इंग्लैंड पहुंचते ही उसे गिरफ्तार कर डिपोर्ट कर दिया गया डिपोर्ट होने के बाद उसे दिल्ली लाया गया और फिर मामले में शामिल दलालों को भी गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेजा गया।

‘मूव ओवरसीज’ बना फर्जीवाड़े का गढ़?

सूत्रों के अनुसार, रुद्रपुर स्थित मूव ओवरसीज लंबे समय से संदिग्ध गतिविधियों का अड्डा बना हुआ था कर्मनदीप औलख, गैरी रंधावा, तालविंदर रंधावा, और तरुण जुनेजा इस नेटवर्क को संचालित करते थे यह गिरोह फर्जी पहचान पत्र, फर्जी पासपोर्ट और वीज़ा तैयार कर युवाओं को विदेश भेजने का धंधा करता रहा सोशल मीडिया पर मामला उजागर होने के बाद दिल्ली पुलिस हरकत में आई और ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू हुई चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस ने दो आरोपियों को तिहाड़ भेजा जबकि दो अन्य को रिहा कर दिया गया यदि यह सच है, तो यह सवाल उठाता है कि आखिर आम नागरिक न्याय की उम्मीद किससे करे? क्या इमीग्रेशन एजेंसियों और दलालों के इस गठजोड़ के आगे कानून भी कमजोर साबित हो रहा है? यह मामला केवल एक फर्जी वीज़ा की घटना नहीं है, बल्कि सिस्टम की चूक, सरकारी एजेंसियों की निगरानी में कमी, और युवाओं के सपनों के व्यापार का गंभीर संकेत है।

देशभर में हजारों युवा हर साल विदेश जाने का सपना देखते हैं। लेकिन ऐसे मामलों से यह सपना एक ‘काला जाल’ बनता जा रहा है। अब जरूरी हो गया है कि सरकार और प्रशासन इस तरह के घोटालों पर कठोर और त्वरित कार्रवाई करे। मूव ओवरसीज जैसे एजेंसियों की पूरी जांच होनी चाहिए, और दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जानी चाहिए, ताकि इमीग्रेशन प्रक्रिया में विश्वास बहाल हो सके।।

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