अपेक्स बिल्डसिस के बाहर 32वें दिन भी मजदूर सत्याग्रह जारी, 102 श्रमिकों की सवेतन बहाली की मांग 23 अक्टूबर को एडीएम की अध्यक्षता में प्रस्तावित त्रिपक्षीय वार्ता से श्रमिकों को न्याय की उम्मीद, मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
रुद्रपुर। सिडकुल पंतनगर स्थित अपेक्स बिल्डसिस लिमिटेड, सेक्टर-09, प्लॉट संख्या-11 के बाहर ऐरा श्रमिक संगठन का मजदूर सत्याग्रह 32वें दिन भी जारी रहा। संगठन से जुड़े श्रमिक अपने परिवारों के साथ कंपनी गेट पर धरने पर बैठे हैं। श्रमिकों की प्रमुख मांग वर्ष 2017 में बंद किए गए कारखाने के 102 स्थायी श्रमिकों की सवेतन कार्यबहाली सुनिश्चित कराने की है।
श्रमिक संगठन के अनुसार, कंपनी प्रबंधन ने 31 जुलाई 2017 को कारखाने में अवैधानिक तालाबंदी की थी और वहां कार्यरत 102 स्थायी श्रमिकों का नागपुर प्लांट में स्थानांतरण कर दिया था। तत्कालीन उपश्रमायुक्त की जांच के बाद इस स्थानांतरण को अवैध घोषित किया गया था। इसके बाद मामला उत्तराखंड उच्च न्यायालय पहुंचा, जहां 20 सितंबर 2017 को कारखाने को अग्रिम आदेश तक सीलबंद करने के निर्देश दिए गए। जिला प्रशासन ने न्यायालय के आदेश का अनुपालन करते हुए कारखाने को सीलबंद कर दिया था।
संगठन ने बताया कि बाद में मामला राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) पहुंचा और 9 जनवरी 2020 को कंपनी को दिवालिया घोषित कर दिया गया। इसके बाद लिक्विडेटर ज्ञान चंद नारंग की नियुक्ति हुई। संगठन का कहना है कि 29 जनवरी 2021 को जिला प्रशासन को भेजे गए नोटिस के बाद कारखाने की सीलबंदी खोली गई। लिक्विडेटर द्वारा जारी नीलामी संबंधी सार्वजनिक सूचना तथा स्वामित्व हस्तांतरण के दस्तावेजों में भी 102 स्थायी श्रमिकों को कारखाने की परिसंपत्तियों के साथ दर्ज किए जाने का संगठन दावा करता है।
श्रमिक संगठन के मुताबिक, 23 मई 2022 को हुई नीलामी प्रक्रिया के बाद जसमृत डिजाइनर प्राइवेट लिमिटेड को 22 जून 2022 को कारखाने का स्वामित्व एवं प्रबंधन हस्तांतरित किया गया। संगठन का कहना है कि नए स्वामी ने नीलामी की शर्तों के पालन के लिए लिखित हलफनामा भी प्रस्तुत किया था। वर्ष 2024 में कारखाना दोबारा चालू होने के बावजूद पुराने स्थायी श्रमिकों की कार्यबहाली नहीं की गई।
संगठन ने बताया कि 8 अक्टूबर 2024 को सहायक श्रमायुक्त के समक्ष कार्यबहाली के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया था। इसके बाद तत्कालीन सहायक श्रमायुक्त ने 27 जनवरी 2025 को कंपनी प्रबंधन को नोटिस जारी कर श्रमिकों की कार्यबहाली सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। संगठन के अनुसार, श्रमायुक्त उत्तराखंड ने 22 अप्रैल 2026 को उपश्रमायुक्त को पत्र भेजकर उत्तर प्रदेश औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के प्रावधानों के तहत विधिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
संगठन का कहना है कि एनसीएलटी की एकल पीठ ने 2 अप्रैल 2024 और डबल बेंच ने 20 सितंबर 2024 को पारित आदेशों में श्रमिकों से संबंधित औद्योगिक विवादों पर सुनवाई को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया था। इसके बावजूद श्रमिकों की कार्यबहाली का मामला अब तक हल नहीं हो पाया है।
श्रमिक संगठन ने आरोप लगाया कि श्रम विभाग और जिला प्रशासन के स्तर पर कई दौर की वार्ताएं होने के बावजूद कंपनी प्रबंधन का रवैया सकारात्मक नहीं रहा है। संगठन ने सहायक श्रमायुक्त की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि श्रमिकों को बार-बार एनसीएलटी जाने की सलाह देना न्यायसंगत नहीं है, जबकि संगठन के अनुसार न्यायाधिकरण अपने आदेशों में इस विषय को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बता चुका है।
संगठन ने जिला प्रशासन से मांग की है कि संबंधित न्यायिक आदेशों और श्रम कानूनों के अनुरूप 102 स्थायी श्रमिकों की सवेतन कार्यबहाली सुनिश्चित कराई जाए। संगठन के अनुसार, 23 अक्टूबर 2026 को एडीएम द्वारा प्रशासनिक विभाग में त्रिपक्षीय वार्ता आहूत की गई है। श्रमिकों को उम्मीद है कि इस बैठक में उनकी वर्षों पुरानी समस्या का समाधान निकलेगा।
संगठन ने चेतावनी दी कि यदि वार्ता के बाद भी कार्यबहाली की मांग पूरी नहीं हुई तो श्रमिक आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे। ऐसी स्थिति में उत्पन्न परिस्थितियों की जिम्मेदारी शासन, जिला प्रशासन और श्रम विभाग की होगी।
आज के सत्याग्रह में मयंक गंगवार, अनीता, रामबेटी, गंगा देवी, शंकर दत्त जोशी, दीवान सिंह, सुनील कुमार, बुद्धसेन, प्रकाश चंद कांडपाल, भारत जोशी, उपेंद्र राय, भूप राम सहित सैकड़ों श्रमिक एवं उनके परिजन मौजूद रहे।।

