80 करोड़ का बस टर्मिनल चार साल से अधूरा, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई फिर शुरू
सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान
रुद्रपुर। शहर में लगभग 80 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा अत्याधुनिक बस टर्मिनल चार वर्ष बाद भी यात्रियों के लिए शुरू नहीं हो सका है। लंबे समय से अधूरी पड़ी इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पीछे सबसे बड़ी बाधा प्रस्तावित मुख्य प्रवेश द्वार पर बना अतिक्रमण माना जा रहा है। इसी बाधा को दूर करने के लिए नगर निगम और जिला प्रशासन ने एक बार फिर अतिक्रमण हटाने का अभियान तेज कर दिया है।
शुक्रवार को प्रशासनिक अधिकारियों, नगर निगम और पुलिस की मौजूदगी में कार्रवाई करते हुए छह दुकानों को हटाया गया। शेष दुकानदारों को अपनी दुकानें स्वयं हटाने के लिए दो दिन का समय दिया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर दुकानें नहीं हटाई गईं तो सोमवार को प्रशासन बुलडोजर की मदद से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करेगा।
2011 में टेंडर, 2016 में हुआ एग्रीमेंट, फिर अटका काम
बस टर्मिनल परियोजना का टेंडर वर्ष 2011 में तत्कालीन भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुआ था। इसके बाद वर्ष 2016 में निर्माण एजेंसी के साथ एग्रीमेंट किया गया और एग्रीमेंट के महज 15 दिन बाद ही निर्माण कार्य के लिए साइट भी सौंप दी गई। हालांकि, साइट के भीतर रहने वाले कुछ लोगों ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की और जनवरी के अंतिम सप्ताह तक अंदर का अतिक्रमण हटा दिया गया। इसके बावजूद मुख्य प्रवेश द्वार के बाहर बना अतिक्रमण अब तक पूरी तरह नहीं हटाया जा सका है, जिससे परियोजना लंबे समय से अधर में लटकी हुई है।
गौरतलब है कि इससे पहले नगर निगम और परिवहन विभाग की ओर से मुख्य प्रवेश द्वार पर बनी कुल 48 दुकानों को नोटिस जारी किए गए थे। कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए इन दुकानों के बिजली कनेक्शन भी काट दिए गए थे, ताकि नए निर्माण कार्य में कोई बाधा न आए। प्रशासन का कहना है कि मुख्य गेट पूरी तरह खाली होते ही बस टर्मिनल का शेष निर्माण कार्य तेजी से पूरा कराया जाएगा और वर्षों से लंबित परियोजना को जनता को समर्पित किया जाएगा।
चार साल से अधूरी इस परियोजना का खामियाजा सबसे अधिक यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। आधुनिक बस टर्मिनल तैयार न होने के कारण यात्रियों को आज भी अस्थायी बस स्टैंड से सफर करना पड़ता है। यहां पर्याप्त सुविधाओं का अभाव है, जिससे प्रतिदिन हजारों यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर निर्माण पूरा हो जाता तो शहर को एक आधुनिक परिवहन सुविधा मिल जाती और यातायात व्यवस्था भी बेहतर होती।
प्रशासन ने प्रभावित दुकानदारों के पुनर्वास की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। नगर निगम के अनुसार अतिरिक्त स्थान पर दुकानों का निर्माण एवं आवंटन करने की योजना बनाई गई है। इसके लिए अब तक 27 दुकानदारों की सूची तैयार की जा चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि पात्र लोगों को नियमानुसार पुनर्वास का लाभ दिया जाएगा ताकि उनकी आजीविका प्रभावित न हो।
हालांकि, प्रशासन की इस कार्रवाई को लेकर प्रभावित व्यापारियों में भारी नाराजगी है। व्यापारियों का कहना है कि अतिक्रमण के दायरे में आई कई दुकानों में पिछले लगभग 20 वर्षों से किरायेदार कारोबार कर रहे हैं और इन्हीं दुकानों से उनके परिवारों का भरण-पोषण होता है। उनका कहना है कि अब मूल मालिक भी इन दुकानों पर अपना अधिकार जता रहे हैं, जिससे विवाद और बढ़ गया है।
व्यापारियों का आरोप है कि बिना समुचित जांच और सत्यापन के सभी दुकानदारों को एक ही श्रेणी में रखकर कार्रवाई की जा रही है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कराए तो वास्तविक पात्र दुकानदारों की संख्या 15 से 20 के बीच ही सामने आएगी। उन्होंने मांग की है कि पहले स्वामित्व, किरायेदारी और वास्तविक पात्रता का विस्तृत सत्यापन कराया जाए, उसके बाद ही अंतिम कार्रवाई की जाए।
वहीं प्रशासन का कहना है कि बस टर्मिनल जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक परियोजना को अब और अधिक विलंबित नहीं किया जा सकता अधिकारियों के अनुसार परियोजना पूरी होने से शहर को आधुनिक बस अड्डे की सुविधा मिलेगी, यातायात व्यवस्था में सुधार होगा और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इसलिए निर्धारित समय के भीतर अतिक्रमण हटाकर निर्माण कार्य को अंतिम चरण तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है।।

