Sunday, September 27, 2026
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ग्रामीण निर्माण विभाग में अधिकारियों की मनमानी – चहेते ठेकेदारों में बांटे जा रहे काम – विकास बजट की बंदरबांट से अन्य ठेकेदारों में रोष

ग्रामीण निर्माण विभाग में अधिकारियों की मनमानी 

– चहेते ठेकेदारों में बांटे जा रहे काम

– विकास बजट की बंदरबांट से अन्य ठेकेदारों में रोष

सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान 

रूद्रपुर। जिले का ग्रामीण निर्माण विभाग इन दिनों भ्रष्टाचार और पक्षपात के आरोपों को लेकर चर्चा में है। विभागीय अधिकारियों की मनमानी का आलम यह है कि निर्माण कार्यों के ठेके लगभग तयशुदा ठेकेदारों को ही बांटे जा रहे हैं। इससे अन्य ठेकेदारों में गहरा असंतोष पनप रहा है। स्थिति ऐसी बन चुकी है कि विभाग में पारदर्शिता की जगह व्यक्तिगत पसंद और लाभ की प्रवृत्ति हावी होती दिखाई दे रही है।

विभाग के मुख्य परिसर में लगे काले शीशों वाले गेट और उसके भीतर बंद कमरों में घंटों चलने वाली कथित गुप्त बैठकों ने आशंकाओं को और गहरा कर दिया है। बताया जाता है कि अधिकारी लगातार उन्हीं चुनिंदा ठेकेदारों के साथ बैठकों में व्यस्त रहते हैं, जिन्हें विभाग का ‘चहेता’ माना जा रहा है। कार्यालय आने वाले अन्य ठेकेदारों के साथ उपेक्षापूर्ण व्यवहार सामान्य बात हो गई है। कई ठेकेदारों का कहना है कि उन्हें फाइल आगे बढ़वाने या काम पाने के लिए कई कई दिनों तक चक्कर लगाने पड़ते हैं, जबकि पसंदीदा ठेकेदारों को सीधे कार्य आदेश थमा दिए जाते हैं, जिससे विभाग की कार्यशैली संदेह के घेरे में आ गई है।

कुठ ठेकेदारों ने नाम ना छापे की शर्त पर बताया कि ग्रामीण निर्माण विभाग में टेंडर प्रक्रिया अब सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है। कई कार्य बिना किसी स्पष्ट मानक या निष्पक्ष प्रक्रिया के सीधे उन्हीं लोगों को दिए जा रहे हैं, जिनके साथ अधिकारी बंद कमरों में बैठकें करते दिखते हैं। इससे न सिर्फ ईमानदार और सक्षम ठेकेदारों के अवसर खत्म हो रहे हैं, बल्कि विकास कार्यों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता भी सवालों के घेरे में आती जा रही है।

सबसे गंभीर आरोप विकास के लिए जारी बजट की बंदरबांट को लेकर लगाए जा रहे हैं। स्थानीय स्रोतों का कहना है कि सरकारी धन का उपयोग पारदर्शी ढंग से नहीं हो रहा है और बजट का बड़ा हिस्सा उन्हीं ठेकेदारों में बांटा जा रहा है जिन्हें अधिकारी का समर्थन प्राप्त है। बजट की वास्तविक स्थिति आम जनता और बाकी ठेकेदारों तक नहीं पहुंच पाती, जिससे भ्रष्टाचार की आशंका और बढ़ जाती है।

कुछ ठेकेदारों ने साफ कहा कि विभाग में भ्रष्टाचार, पक्षपात और अनियमितताओं ने काम करना मुश्किल कर दिया है। शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हो रही और अधिकारी भी जवाबदेही से बचते नज़र आ रहे हैं। जिले के विकास कार्यों का भार संभालने वाले इस विभाग की कार्यप्रणाली पर उठते सवाल गंभीर हैं। यदि आरोपों की जांच पारदर्शी तरीके से नहीं की गई, तो विकास कार्य प्रभावित होंगे, सरकारी धन का दुरुपयोग बढ़ेगा और विभाग की विश्वसनीयता पर स्थायी आंच आएगी।।

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