ऊधम सिंह नगर

प्राधिकरण और RERA के नाम पर खेल: ग्रामीण क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों का धंधा जारी, प्रशासन बेखबर

प्राधिकरण और RERA के नाम पर खेल: ग्रामीण क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों का धंधा जारी, प्रशासन बेखबर

सौरभ गंगवार/टुडे हिंदुस्तान 

पार्ट.1

शहरी क्षेत्रों में विकास प्राधिकरण द्वारा अवैध कॉलोनियों पर सख्ती बढ़ाए जाने के बाद अब कॉलोनाइजरों ने ग्रामीण इलाकों का रुख कर लिया है। शहरों में कार्रवाई के डर से बचने के लिए ये लोग अब कृषि भूमि पर बिना किसी वैधानिक अनुमति के अवैध कॉलोनियां काट रहे हैं। इससे जहां एक ओर भूमि उपयोग नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार को राजस्व का भी बड़ा नुकसान हो रहा है।ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से पनप रही इन अवैध कॉलोनियों का जाल अब चिंताजनक रूप लेता जा रहा है। बिना नक्शा पास कराए, बिना सड़क, नाली, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था किए ही प्लॉटिंग कर दी जाती है और आम लोगों को सस्ते प्लॉट का लालच देकर बेचा जा रहा है। कई मामलों में खरीदार अपनी जीवन भर की जमा पूंजी लगाकर ऐसे प्लॉट खरीद लेते हैं, लेकिन बाद में उन्हें पता चलता है कि जमीन न तो आवासीय है और न ही उस पर निर्माण की अनुमति है।

ताजा मामला गंगापुर क्षेत्र के पीछे आश्रम के सामने का सामने आया है, जहां अश्वनी नामक व्यक्ति द्वारा कृषि भूमि पर बिना धारा 143 कराए अवैध कॉलोनी विकसित की जा रही है। जानकारी के अनुसार, भूमि का भू-उपयोग परिवर्तन (धारा 143) कराए बिना ही प्लॉटिंग की जा रही है, जो कि पूरी तरह नियमों के विरुद्ध है। इसके बावजूद संबंधित व्यक्ति द्वारा खुलेआम प्लॉट बेचे जा रहे हैं।सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ग्राहकों को गुमराह करने के लिए कॉलोनी स्थल पर विकास प्राधिकरण और RERA (रेरा) से संबंधित एक बोर्ड लगा दिया गया है। इस बोर्ड के जरिए यह दिखाने की कोशिश की जा रही है कि कॉलोनी वैध है और उसे आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त हैं, जबकि हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं है। यह कदम सीधे तौर पर लोगों को भ्रमित कर अवैध लाभ कमाने की मंशा को दर्शाता है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस तरह की अवैध कॉलोनियों के चलते न केवल क्षेत्र का अनियोजित विकास हो रहा है, बल्कि भविष्य में कानून-व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं को लेकर भी समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। वहीं, ऐसे मामलों में खरीदारों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ता है, क्योंकि बाद में प्रशासन द्वारा कार्रवाई होने पर निर्माण ध्वस्त किया जा सकता है या भूमि विवाद में फंस सकता है।विशेषज्ञों का मानना है कि बिना वैधानिक स्वीकृति के काटी गई कॉलोनियों में निवेश करना बेहद जोखिम भरा है। ऐसे मामलों में न तो बैंक लोन आसानी से मिलता है और न ही रजिस्ट्री या अन्य कानूनी प्रक्रियाएं सुरक्षित मानी जाती हैं। इसके बावजूद, जागरूकता के अभाव और सस्ते प्लॉट के लालच में लोग फंस जाते हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर प्रशासन इन अवैध गतिविधियों से अनजान कैसे है, या फिर जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है? यदि समय रहते ऐसे कॉलोनाइजरों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह प्रवृत्ति और तेजी से फैल सकती है और ग्रामीण क्षेत्रों का स्वरूप पूरी तरह बिगड़ सकता है।अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और अवैध कॉलोनियों के इस बढ़ते नेटवर्क पर कब तक लगाम लगाई जाती है। साथ ही आम जनता को भी सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि वे किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी का शिकार न बनें।।

error: Content is protected !!
Call Now Button